उरई-हड़ताल पर गए कोटेदार, बोले- भाड़े का भुगतान नहीं हो रहा

रिपोर्ट- अवनीत गुर्जर
जालौन/उरई/ कोंच । खाद्यान्न के भाड़े का भुगतान नही होने से नुकसान उठा रहे कोटेदार अनिश्चतकालीन हड़ताल पर चले गए। उन्होंने खाद्यान्न उठाने से इनकार कर दिया है। कोटेदारों के तीन दिन से हड़ताल पर रहने के कारण गरीबो को मिलने बाला खाद्यान्न अधर के लटक गया।
विकास खण्ड के ग्रामीण तथा नगर क्षेत्र के कोटेदारों ने गोदाम से खाद्यान्न उठाने से इन्कार कर दिया है। कोटेदार द्वारा की इस घोषणा से अक्टूबर माह का खाद्यान्न उठना शुरू नहीं हो पाया है, खाद्यान्न गोदाम में ही रखा है।
प्रतिमाह गोदाम से खाद्यान्न का उठान कोटेदार माह की 23 तारीख से 30 तारीख तक करते है। कोटेदार यूनियन के तहसील अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह बताया कि वह खाद्यान्न उठाने में असमर्थ है। अप्रैल 2001 से मई 2012 तक खाद्यान्न का भाड़ा जो बकाया है । ये भाड़ा 5 रुपये 75 पैसे प्रति कुंटल के हिसाब से दिया जाए, जून 2012 से दिसम्बर 2015 तक भाड़ा 10 रुपये प्रति कुंटल के हिसाब से दिया जाए। उनका कमीशन जो 2012 से नही दिया गया वह भी दिलवाया जाए। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 का अनुपालन आज तक सरकार नही कर पाई अनुपालन में डोर टू डोर स्टेप डिलवरी जो लागू की जानी थी वह लागू नही हुई ।
जिस कारण उन्हें गोदाम से दुकान तक माल उठाकर ले जाना पड़ता है भाड़े की रकम उन्हें पानी जेब से खर्च करनी पड़ रही है। कोटेदारों ने सरकार से मांग को है उन्हें 30 हजार रुपये प्रतिमाह का मानदेय दिया जाए या फिर उनका कमीशन बढ़ाकर 2 सौ रुपये प्रति कुंटल कर दिया जाए । उन्हें कोटेदार न कहकर उन्हें सरकार सेबक का दर्जा दिया जाए खाद्यान के उठान का वितरण का सत्यापन खाद्य सुरक्षा समिति के सदस्यों द्वारा कराया जाए ।
इस मौके पर कोटेदारों ने गोदाम के सामने आन्दोलन किया जिसमें सभी  कोटेदार मौजूद रहें।

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