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कुमार विश्वास का केजरीवाल पर तीखा हमला

नई दिल्ली 11 नवबंरः आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्य कवि कुमार विश्वास ने आजतक के मंच से मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर तीखा हमला बोला। कुमार ने केजरीवाल का नाम लिये बिना कविता के जरिये अपना पक्ष रखा।

आज तक के मंच पर पहुंचे कुमार ने कविता पाठ किया। उन्हांेने अपनी बातांे को भी रखा।

कुमार ने बताया कि किस प्रकार उन्हंे चुपरहने की सलाह दी जा रही है।

 

 

 

 

 

 

 

वे बोले दरबार सजाओ, वे बोले जयकार लगाओ

वे बोले हम जितना बोलें तुम केवल उतना दोहराओ

वाणी पर इतना अंकुश कैसे सहते

हम कबीर के वंशज चुप कैसे रहते

वाणी पर इतना अंकुश कैसे सहते

हम दिनकर के वंशज चुप कैसे रहते

विश्‍वास ने कहा, पहले जनता के नाम पर व्‍यवस्‍थाएं बनाई जाती है फिर व्‍यवस्‍था के नाम पर जनता को बनाया जाता है. आगे उन्‍होंने कहा, वे जिस रास्‍ते पर चले थे, उसे उन्‍होंने बदल दिया. हमने जो सपने देखे थे, उन्‍होंने उसे राजनीति में बदल दिया.

वे बोले जो मार्ग चुना था

ठीक नहीं था, बदल रहे हैं

मुक्‍तवाह संकल्‍प गुना था

ठीक नहीं था, बदल रहे हैं

हमसे जो जयघोष सुना था

ठीक नहीं था, बदल रहे हैं

हम सबने जो ख्‍वाब बुना था

ठीक नहीं था, बदल रहे हैं

इतने बदलवों में मौलिक क्‍या कहते

हम कबीर के वंशज चुप कैसे रहते

हमने कहा अभी मत बदलो

दुनिया की आशाएं हम हैं

वे बोलो अब तो सत्‍ता की

वरदायी भाषाएं हम हैं

हमने कहा व्‍यर्थ मत बोलो

गूंगों की भाषाएं हम हैं

वे बोलो बस शोर मचाओ

इसी शोर से आए हम हैं

विश्‍वास ने कहा, ‘मैं इसलिए याद नहीं रखा जाऊंगी, राजनीति के विचलन पर मैं चुप था या बोला था.’

इतने मतभेदों में मन की क्‍या कहते

हम कबीर के वंश चुप कैसे रहते

हमने कहा शत्रु से जूझो

थोड़े और वार तो सहलो

ये राजनीति है, तुम भी इसे प्‍यार से सहलो

हमने कहा उठाओ मस्‍तक

खुलकर बोलो, खुलकर कह लो

इस पर राजमुकुट है, जो भी चाहे सह लो

इस गीली ज्‍वाला में हम कब रहते

हम करीब के वंशज चुप कैसे रहते

हम दिनकर के वंशज चुप कैसे रहते

अपनी कविता के जरिए कुमार विश्‍वास ने इशारा किया कि उन्‍होंने पार्टी के नेताओं को खुलकर बोलने को कहा, लेकिन उन्‍हें राजमुकुट का हवाला देकर सब कुछ सहन करने को कहा गया.

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