०रखरखाव का ठेका तो निरस्त कर दिया लेकिन दोबारा उठाने की जेहमत नहीं उठाई पालिका ने
कोंच । बुंदेलखंड का कमोवेश सबसे सुंदर कोंच का ऐतिहासिक चंदेलकालीन सागर तालाब आजकल पालिका की उपेक्षा का शिकार होकर अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। साल भर पहले तक जो तालाब पानी से लबालब भरा रहता था उसका पानी अब सूख गया है और सीढियां निकल आईं हैं। वोटिंग के लिए मंगाई गईं नावें टूट फट गई हैं और औंधें मुंह तालाब के रैंप पर पड़ी हैं। इस तालाब के सुंदरीकरण पर सरकारी धन का करोड़ों रुपया खर्च हुआ था लेकिन सारा पैसा जैसे पानी में डूब गया है। रखरखाव के लिए पीपीपी मॉडल पर ठेका हुआ था लेकिन ठेकेदार पर अनियमितताओं के आरोप लगे और पालिका द्वारा उसका ठेका निरस्त कर दिया गया। अब हालत यह है कि तालाब की तरफ किसी का ध्यान नहीं होने से इसकी सुंदरता तो प्रभावित हो ही रही है, पालिका की कार्यशैली पर भी बड़े बड़े सवालिया निशान लग रहे हैं।
गौरतलब है कि नगर के बीचों बीच नगर पालिका कार्यालय से सटा हुआ है सागर तालाब। 23715 वर्ग मीटर का कमोवेश वर्गाकार यह सागर तालाब चंदेलकालीन ऐतिहासिक धरोहरों में शुमार है। पालिका के पिछले कई चुनाव इसी सागर तालाब के सुंदरीकरण की प्राथमिकता बाले चुनावी घोषणा पत्रों पर लड़े भी गए और जीते भी गए। 1996 और 2001 में पालिकाध्यक्ष बने स्व. अशोक शुक्ला ने इसके सुंदरीकरण की शुरुआत की थी और काफी काम कराया था। इसके बाद पूर्व पालिकाध्यक्षा विनीता सीरौठिया के कार्यकाल में करोड़ों रुपए खर्च कर इसका व्यापक सुंदरीकरण कराया गया था और तालाब भरने के लिए अलग से एक नलकूप की स्थापना भी कराई गई थी जो अधिकांश समय चलता रहता था और तालाब लबालब रहता था। इसके रखरखाव के लिए तालाब का ठेका पांच साल के लिए सक्षम इंटरप्राइजेज को 4 लाख 10 हजार मेउठा दिया गया था। इसी बीच निकाय चुनाव हो गए और पालिका की बागडोर डॉ. सरिता वर्मा के हाथों में आ गई। पालिका के सभासदों द्वारा बोर्ड में प्रस्ताव लाकर उक्त ठेका निरस्त करा दिया गया, सभासदों ने तय शर्तों के मुताबिक काम नहीं होने का आरोप लगाया था। ठेका केवल डेढ साल ही चल सका, इस प्रकार तालाब के रखरखाव की जिम्मेदारी पालिका के कंधों पर आ गई। ठेका निरस्त हुए पांच महीने हो गए और पालिका न तो दूसरा ठेका उठा सकी और न ही अपनी रखरखाव की जिम्मेदारी निभा सकी। आज हालत यह है कि तालाब गंदगी से भरा पड़ा है, तालाब का पानी सूख जाने के कारण यह बदसूरत दिखाई देने लगा है।
औंधे मुंह पड़ी हैं नौका विहार के लिए आईं नावें
सागर तालाब में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए नौका विहार की व्यवस्था की गई थी। चार पैडल वोट और एक बड़ी नाव तालाब में सैलानियों को आनंदित करती थीं और ठेकेदार को भी कुछ पैदावारी हो जाती थी। ठेकेदार मत्स्य पालन भी करता था। जब से ठेका निरस्त हुआ है तभी से वोट्स औंधे मुंह पड़ी हैं और टूट फूट गई हैं। तालाब के बीचोंबीच लगा रंगविरंगा फव्वारा भी बंद पड़ा है। तालाब के चारों तरफ लगवाई गईं लाइटिंग भी ठप होने की बजह से वहां अंधेरे का साम्राज्य हो गया है। चूंकि इसके रखरखाव की पूरी जिम्मेदारी ठेकेदार पर थी सो पहले व्यवस्थाएं बनी रहीं लेकिन अब पालिका खुद इसके रखरखाव की जिम्मेदार है और वह फिलहाल अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा पा रही हइसी महीने के अंत तक ठेका उठा दिया जाएगा-ईओ
सागर तालाब बदहाल है, ऐसा ईओ बुद्घिप्रकाश नहीं मानते हैं। उनका कहना है कि हां रखरखाव में कुछ कमियां हैं जिसकी मुख्य बजह इसका ठेका नहीं हो पाना हो सकता है लेकिन ठेके की प्रक्रिया चल रही है और इसी माह के अंत तक तालाब का ठैका उठा दिया जाएगा। उन्होंने कहा है कि तालाब कोंच की अस्मिता से जुड़ा मामला है लिहाजा इसकी सुंदरता को बरकरार रखने में कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ी जाएगी।
