नई दिल्ली 22 अप्रैलः 2019 के चुनाव को लेकर राजनैतिक दलांे के अंदर ही अंदर समीकरण बन रहे है। विपक्ष एक मंच पर आने की रणनीति बना रहा, तो कांग्रेस राहुल को स्थापित करते हुये सत्ता की दहलीज पर पहुंचना चाहती है। इधर, बीजेपी और आरएसएस ने चुनाव मे निणार्यक भूमिका निभाने वाले युवा वोटरो पर नजर लगा दी है। आरएसएस और बीजेपी ने उन 1.8 करोड़ युवओ को फोकस करना शुरू कर दिया है, जो पहली बार वोटर बने हैं।
आम चुनाव मे कैसे मोदी लहर चले और किस तरह प्रचंड बहुमत मिले। बीजेपी के थिंक टैंक के सामने यह चुनौती है। कहते है कि जब चुनौती सामने होती है, तब रास्ते तलाशने को दिमाग भी तेज चलता है।
बीजेपी और आरएसएस के लोग अपने दिमाग को खोलकर बैठे। कहा जा रहा है कि मंथन के दौर मे एक नया उपाय यह निकला कि क्यो ना विपक्ष की आपसी रस्साकसी के बीच उन लोगो को अपने पाले मे कर लिया जाए, जिन्हे पहली बार लोकतंत्र के यज्ञ मे शामिल होने का मौका मिल रहा है।
मतदान का अधिकार पाने वाले युवाओं की संख्या 1.8 करोड़ है, जो पहली बार मतदान करेंगे. इस बार के लोकसभा चुनाव में इन युवा मतदाताओं की अहम भूमिका होगी. लिहाजा बीजेपी इनको अपने पाले में लाने की पूरी कोशिश कर रही है. इसी कड़ी में बीजेपी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कार्यकर्ता कॉलेज परिसरों में युवाओं को आकर्षित करने में जुट हुए हैं.
RSS की यूथ विंग अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने पहली बार वोटर बनने जा रहे युवाओं से जुड़ने के लिए बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश समेत अन्य दक्षिण भारत के राज्यों में व्यापक स्तर पर अभियान शुरू किया है. ABVP के एक कार्यकर्ता ने मेल टुडे को बताया कि हाल ही में ABVP ने पटना, भागलपुर और मुजफ्फरपुर की यूनिवर्सिटी में 25 साल बाद पहली बार छात्र संघ चुनावों में जीत दर्ज की है.कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं और इनके जरिए पहली बार वोटर बने छात्र-छात्राओं को जोड़ने की कोशिश की जा रही है. इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी नए वोटरों से जुड़ने की बात कह चुके हैं. उन्होंने बताया कि इस साल करीब 1.8 करोड़ नए वोटर पंजीकृत होंगे, जो आगामी लोकसभा चुनाव में मतदान करेंगे
इसके अतिरिक्त बीजेपी सूत्रों का कहना है कि पिछले तीन साल से RSS छात्रों को विचारधारा से जोड़ने के लिए व्यापक स्तर पर अभियान चला रहा है. पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में आदिवासी युवाओं के लिए RSS ने कई शैक्षणिक और स्पोर्ट्स कार्यक्रम लॉन्च किए हैं. बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि उनकी पार्टी ने हाल ही में हुए त्रिपुरा, मेघालय और नगालैंड विधानसभा चुनाव में भी ऐसी ही रणनीति अपनाई थी, जिसके सकारात्मक परिणाम भी देखने को मिले थे.
