झाँसी। देश का भविष्य हमारी युवक पीढ़ी और वह नन्हे छात्र-छात्राएं हैं जो ज्ञान को अर्जित कर अपने जीवन की ठोस बुनियाद खड़ी करते हैं, इनको ज्ञान देने का जिम्मा उठाने वाले इन दिनों इतने आहत है कि इनके शब्दकोश से निकलने वाले शब्द सिर्फ अपनी पीड़ा बयां कर रहे हैं।
गुरु बिना ज्ञान नहीं । यह अटल सत्य है , लेकिन जब गुरु ही विपदा में फस जाए तो ज्ञान लेने वालों को कितनी परेशानी होगी, यह समझना होगा ।
दरसल, यही बात इसलिए उठ रही है कि झांसी में अधिकांश कोचिंग संचालक अचानक से नियम और व्यवस्थाओं का बोझ अपने सर आने परेशान होते हैं । अधिकांश कोचिंग संचालकों का कहना है कि उनकी मंशा केवल ज्ञान से मिलने वाले धन को अर्जित करने पर नहीं है, लेकिन बाहरी आवरण में इन्हें मोटा पैसा कमाने वाला माना जा रहा है।
उन्हें मानक और नियमों के हवाले में अचानक बांधे जाने से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कोचिंग संचालकों का अपना तर्क है कि वह शिक्षा देने के साथ सुरक्षा का पूरा ध्यान रखते हैं । यदि उन्हें बच्चों के भविष्य के साथ सुरक्षा की चिंता ना हो तो है क्यों कोचिंग का संचालन करें?
झांसी सांसद अनुराग शर्मा और महापौर रामतीर्थ सिंघल के पास जब कोचिंग संचालक परेशानी को सुनाने पहुँचे, तो उनके तर्क कुछ इसी प्रकार थे। जाहिर है कि कोचिंग संचालकों को इस समस्या से निपटने में जनप्रतिनिधियों की मदद की जरूरत है ।
उम्मीद के दामन को अपनी मांगों के साथ लेकर संचालक जब सांसद अनुराग शर्मा से मिले, तो उन्होंने मदद के साथ प्रकरण को गंभीरता से देखा और सुना ।
संचालकों में उम्मीद जगी , लेकिन यह उम्मीद कब पूरी होगी और क्या कोचिंग संचालक मानक और नियमों के जबरन थोपे जाने वाले डर से बाहर आ सकेंगे ? यह बड़ा सवाल है!
