झाँसी-राष्ट्र के उत्थान में योगदान ईश्वर भक्ति का सर्वोत्तम उदाहरण- महंत मदन मोहन दास

झांसी। वृन्दावन धाम से पधारे श्री श्री 1008 श्री महंत मदन मोहन दास ने भक्तमाल कथा के पांचवें दिन कहा कि राष्ट्र के उत्थान में योगदान ईश्वर भक्ति का सर्वोत्तम उदाहरण है। कथा व्यास ने त्रिलोकी भक्त की कथा सुनाई। कहा कि एकांत में बैठकर माला फेरना ही ईश्वर भक्ति नहीं है। जो लोग राष्ट्र के नव निर्माण व उत्थान में अपना योगदान दे रहे हैं। वह सचमुच में भगवान की भक्ति का सर्वोत्तम उदाहरण है। त्रिलोकी भक्त की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि उनकी श्रद्धा व भक्ति का प्रभाव था कि भगवान को उनकी वीर संतान बनकर उनके घर जन्म लेना पड़ा। प्रभु ने इस अवतरण में मातृभूमि की सेवा का श्रेष्ठ उदाहरण प्रस्तुत किया है।

महंत श्री मदन मोहन दास ने प्रवचनों से भक्तों को भाव-विभोर किया। उन्होने कहा कि ईश्वर सर्वोपरि है और बाकी सभी जीव उनके सेवक हैं। जब हम अपने आपको कर्ता मान लेते हैं तो हम दुखी होते हैं। हरिनाम के द्वारा ही हम भगवत धाम को वापस जा सकते हैं, क्योंकि भगवान के पास वापस जाना ही हमारे जीवन का एकमात्र उद्देश्य है। महाराज ने कहा कि एक भक्त को चाहिए कि वो अहंकार को अपने मन में न आने दे, क्योंकि अहंकार से ही भक्ति का नाश हो जाता है। जीव को हर समय मृत्यु के लिए तैयार रहना चाहिए, क्योंकि मृत्यु कभी किसी को भी आ सकती है। अपना जीवन ऐसे जीएं जैसे आज ही आपका अंतिम दिन हो। इस भाव से जीने से जीव सब बुराइयों से परे हट सकता है। स्वामी जी ने प्रसंग के दौरान कर्माबाई की कथा का बखान किया। उन्होंने कहा कि कर्माबाई भगवान जगन्नाथ जी को रोजाना अपने हाथों से खिचड़ी बनाकर भोग लगाती थी। भगवान भी रोज स्वयं आकर उनकी खिचड़ी खाते थे, क्योंकि वह भाव से भगवान की सेवा करती थी। इसलिए भगवान को छप्पन भोग की जगह कर्माबाई की खिचड़ी पसंद आई थी। जब कर्माबाई से अपना शरीर त्यागा तो भगवान की आंखों में भी आंसू थे। श्री मेहंदी बाग सरकार के प्रकटोत्सव के उपलक्ष्य में श्री राम जानकी मंदिर मेहंदी बाग में भक्तमाल कथा के प्रारंभ में पूजन रामप्रिया दास महंत जी ने किया। वंश अड़जारिया, रिया धन्वंतरी दास के भजनों ने भक्तों को झूमने पर मजबूर कर दिया।

इस अवसर पर ओरछा, टीकमगढ़, ललितपुर, जालौन, हमीरपुर, बांदा के साथ झांसी जनपद के विभिन्न महंत, साधु संत कथा स्थल पर उमड़ पड़े। इस दौरान, सदर विधायक रवि शर्मा, जिलाधिकारी के माता-पिता, प्रेम प्रकाश, लाली दुबे, बॉर्बी, गौरी शंकर दुबे, शैलेन्द्र अड़जारिया आदि उपस्थित रहे। अंत में आभार विश्व हिंदू परिषद महामंत्री अंचल अरजरिया ने व्यक्त किया।

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