झांसीः प्रदीप जैन फिर जनसैलाब के साथ संघर्ष के रास्ते पर!

झांसीः कहते है कि वक्त करवट लेता है। मौका देता है। नजाकत समझो और भुनाओ। किस्मत भी तभी आपका साथ देती है। राजनैतिक जीवन मे वक्त आम जीवन से कुछ ज्यादा ही मेहरबानी के गीत गाने को आतुर रहता है। प्रदीप जैन की राजनैतिक पारी मे वक्त नया अंदाज देने के मूड मे है। प्रदीप भी जैसे तैयार है। संघर्ष का पथ छोड़ने की आदत नहीं। जनता की आवाज बनने का मौका कैसे छोड़ दे। 29 अप्रैल एक बार फिर पुराने प्रदीप की अदा और अदांज सरकार के सामने चुनौती बनकर पेश होगी।

जीवनकाल मे कई शख्सियतें धरती पर अटल ध्रुव तारे सी होती है। यह बात अलग है कि इन्हे आरोपो मे जकड़ने की कोशिश भी होती कि चंद चेहरो  की चापलूसी का दरबार इनकी काया को धूमिल कर रहा है। पर, ऐसा होता नही है। शख्सियत के लिये कोई चापलूस, तिकड़मबाज चंद पल के लिये बुरे साये की तरह नजर आने वाला हो सकता है, लेकिन अटल ध्रुव जैसी शख्सियते अपनी रोशनी विखरने का काम अनवरत जारी रखती है।

बुन्देली माटी के अटल ध्र्र्रुव कहे जाने वाले प्रदीप जैन की झोली मे वक्त ने हर उस अंदाज को भरा है, जिसे जनता जर्नादन के भलाई मे शामिल किया जाता है। दान, पुण्य, गरीबो  की सेवा, देश सेवा, समाज सेवा और हर किसी को संवारना।

शख्सियत की पहल वक्त अपने हिसाब से तय करता है। सो, एक पहल तय की गयी है। प्रदीप भी पहल का नुमाइंदा बनने को तैयार है। तैयार तो जनबा हमेशा रहे। झांसी को भी बहुत कुछ दिया।

जब सितारे चमक रहे थे, तब झांसी की झोली मे इन्टरसिटी, कृषि विश्वविद्यालय, मेडिकल कालेज को एम्स का दर्जा, रेल नीर फैक्टी, भेल को आर्डर सप्लाई, आर्मी स्कूल आदि आदि ना जाने कितनी सौगाते दी।

इन सौगातो  से प्रदीप की शख्सियत और निखर जाती, लेकिन बुरे वक्त का साया दरवाजे पर पहुंचा, तो जमा भीड़ का मन उखाड़ दिया। चुनाव की चाल मे शिखर से तीसरे पायदान पर आ गये। जश्न मे दूसरे डूबे। वाह वाही होती रही, लेकिन लहर मे लहराये जनमानस को उनकी तारीफ करने का एहसास बाद मे हुआ। अब बोल रहे-प्रदीप ही अच्छे है। चाहे जहां पकड़ लो। कुछ भी करने को तैयार रहते। झांसी के लिये बहुत काम कराये।

सहज मुलाकात, सीधी बात। यह मुक्कमल स्लोगन प्रदीप के जीवन को दर्शाता आईना है। 29 को एक बार फिर रणबांकुरा धरती पर आसमान से बरसती आग मे जनता के साथ सरकार को चेताएगा। आवाज देगा, हालात बदलने की चुनौती देगा। देखना यह होगा कि जनता के साथ प्रदीप जैन का संघर्ष उन्हे इस बार शिखर पर पहुंचाएगा?

 

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