नई दिल्ली 21 मार्च। आज भारतीय जनता पार्टी में 184 उम्मीदवारों की सूची जारी की। इस सूची में भाजपा के वरिष्ठ नेता और राजनीति के लौह पुरुष लालकृष्ण आडवाणी का नाम शामिल नहीं है । आडवाणी की जगह गांधीनगर से भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को मैदान में उतारा गया है ।
1990 के दशक में राम मंदिर आंदोलन के जरिए पूरे देश में भाजपा को एक अलग पहचान दिलाई थी आज आडवाणी राजनीतिक जीवन उस मोड़ पर आ गए हैं , जिसमें उनका सन्यास का रास्ता साफ होने लगा है।
आडवाणी 1999 2004 2009 और 2014 में लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं। इस समय वह सातवीं बार लोकसभा सांसद के रूप में सक्रिय हैं। इनमें से छह बार वह गांधीनगर सीट से सांसद चुने गए। 90 के दशक में भाजपा के लिए एक नारा था भाजपा की तीन धरोहर अटल आडवाणी और मुरली मनोहर।
कहा जाता है कि लालकृष्ण आडवाणी ने राजनीतिक जीवन में हमेशा परिवारवाद का विरोध किया यही कारण रहा कि उनका बेटा और बेटी राजनीति में नहीं है।
कभी भाजपा का संगठन लालकृष्ण आडवाणी की मुट्ठी में होने की बात कही जाती थी आज वही लालकृष्ण आडवाणी राजनीतिक जीवन में सन्यास के रास्ते की तरफ बढ़ते नजर आ रहे हैं।
