प्रदीप जैन के मुरीद हुये कांग्रेस के बड़े नेता!

झांसी: सहजता और धैर्य। कहने को यह दो शब्द है,लेकिन इनकी तासीर बहुत है। इन शब्दो को आत्मसात कर जीवन पथ पर आगे बढ़ने वाला इंसान विरोध के बीच कैसे कामयाबी हासिल करता है, इसका जीता जागता उदाहरण है पूर्व केन्द्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य। कलम, कला और कृपाण की धरती बुन्देली माटी के सपूत पूर्व केन्द्रीय मंत्री प्रदीप  जैन आदित्य एक बार फिर से रौ मे  नजर आ रहे हैं। सहजता, सुलभता और सीधा संवाद की राह के जरिये आम लोगो के दिलो मे  राज करने वाले प्रदीप की पकड़ के आज कांग्रेस के दिग्गज भी कायल हो गये। उन्हांेने सार्वजनिक तौर पर तो इस बात को नहीं कहा, लेकिन मंच पर जब माहौल चर्चा का था, तब नेताओ  के चेहरे की मुस्कान और कानाफूसी कमोवेश यही दर्शा रही थी।

कहा जाता है कि बुन्देलखण्ड मे  कांग्रेस का पुराना जनाधार है। पूर्व मे  अनेक राजनेताओ  ने यहां की जनता का प्यार पाकर विजयी परचम लहराया। बदलते वक्त मे  जब धुरंधर रिटायरमेट के करीब आये, तो युवा नेता प्रदीप जैन आदित्य को कांग्रेसी खेमे से विधायकी का चुनाव लड़ाने का फैसला किया गया। यह वो दौर था, जब प्रदीप जैन अपने सीनियर नेताओ  के साथ कदमताल करते हुये भविष्य का तानाबाना बुन रहे थे। चुनाव मे  जाने वाले प्रदीप जैन आदित्य को जनता का प्यार उनकी सादगी, आम आदमी की आवाज बनने और छोटे-बडे़ मे  भेद न करने के कारण जीत के उपहार के रूप मे  मिला। प्रदीप जैन जनता से मिली उस विरासत को आज भी संजोकर रखे हैं।

सत्ता हो या विपक्ष। दोनो स्थितियो मे  सहजता के साथ पार्टी की मजबूती की दिशा मंे चिंतन ने प्रदीप जैन को न केवल सोनियां गांधी बल्कि राहुल गांधी का भी करीबी बना दिया। पार्टी नेताओ  की सलाह और आदेश का अक्षरशः पालन करने वाले प्रदीप जैन पिछले चुनाव मे  मिली हार के बाद जनता के बीच से दूरी बनाने की अपेक्षा मुददो  की तलाश मे  जुटे रहे। आज उन्हांेने स्व. इंदिरा गांधी की जन्मशताब्दी समारोह के जरिये सरकार को घेरा और दिखा दिया कि वो बुन्देली माटी के हक और जनता की आवाज बनने का काम करते रहंेगे।

यही कारण रहा कि मंच से गुलाब नबी आजाद, राज बब्बर, जितिन प्रसाद, पी एल पुनिया आदि कांग्रेस के बड़े नेता भीड़ देख बोल उठे -जय हो बुन्देली माटी।

 

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