*भारत में 100 में से 99 पेमेंट अब डिजिटल, कैश-चेक से पैसा देने वाले अब लगभग खत्म!*
*भारत अब तेजी से कैशलेस इकोनॉमी की ओर बढ़ चुका है.*
*35 फीसदी की ग्रोथ के साथ भारत बना दुनिया का डिजिटल पेमेंट लीडर*
* 67 साल पुराने वीजा कार्ड को यूपीआई ने 9 साल में पीछे छोड़ा
* भारत के यूपीआई ने लेनदेन के मामले में वीजा कार्ड को भी पीछे छोड़ दिया है
* बंद होने वाली है वीजा-मास्टरकार्ड की दुकान
* यूपीआई को आजादी के बाद देश के फाइनेंशियल सिस्टम में सबसे क्रांतिकारी कदम बताया जा रहा है
* वीजा और मास्टरकार्ड जैसी कंपनियों की भी सांसें अटकी हुई हैं
* यूपीआई से रोजाना लेनदेन अब वीजा कार्ड के मुकाबले कहीं आगे निकल चुका है
* पैसों में इसका आंकड़ा देखें तो दुनिया के सभी कार्ड से 12 गुना आगे दिख रहा है
*भारत ने डिजिटल पेमेंट की दुनिया में यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है।*
■ साल 2025 की पहली छमाही में यूपीआई ट्रांजैक्शनों में 35 प्रतिशत की रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस अवधि में कुल 106.36 अरब ट्रांजैक्शन किए गए, जिनकी कुल वैल्यू 143.34 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई।
■ उपलब्ध आंकड़े दर्शाता है कि अब यूपीआई केवल एक पेमेंट सिस्टम नहीं, बल्कि भारत के आम नागरिकों की रोजमर्रा की जरूरत बन चुका है।
■ आज यूपीआई का इस्तेमाल किराने की दुकान, सब्जी बाजार, टैक्सी, पेट्रोल पंप से लेकर ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म तक हर जगह किया जा रहा है। इसकी सबसे बड़ी ताकत है तेज़, आसान और सुरक्षित पेमेंट प्रोसेस, जिसने डिजिटल लेनदेन को देश के हर कोने तक पहुंचा दिया है।
■ आने वाले महीनों में यूपीआई का यह ग्रोथ ट्रेंड और तेज होगा, क्योंकि यूपीआई लाइट, यूपीआई क्रेडिट लाइन और इंटरनेशनल यूपीआई पेमेंट जैसे नए फीचर्स धीरे-धीरे व्यापक रूप से अपनाए जा रहे हैं।
■ पर्सन-टू-मर्चेंट यानी दुकानदार या व्यापारी को किए जाने वाले यूपीआई लेनदेन में 37 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो बढ़कर 67.01 अरब तक पहुंच गए हैं।
■ अब देशभर के छोटे दुकानदार, स्ट्रीट वेंडर्स और माइक्रो बिजनेस तेजी से डिजिटल पेमेंट अपना रहे हैं। यही बदलाव भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव साबित हो रहा है।जो लोग पहले केवल नकद लेनदेन पर निर्भर थे, वे अब यूपीआई के जरिए पेमेंट स्वीकार करना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। इससे न सिर्फ व्यापार में पारदर्शिता बढ़ी है, बल्कि छोटे कारोबारियों की डिजिटल पहचान और वित्तीय पहुंच भी मजबूत हुई है।
■ इसी तरह, पॉइंट-ऑफ-सेल टर्मिनलों की संख्या में भी तेजी से बढ़ोतरी हुई है -29 प्रतिशत बढ़कर अब यह 1.12 करोड़ तक पहुंच चुकी है। यह आंकड़े साफ दिखाते हैं कि व्यापारी वर्ग अब तेजी से डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को अपना रहा है।
■ छोटे व्यापारियों से लेकर बड़े रिटेल नेटवर्क तक, सभी अब डिजिटल पेमेंट को सुरक्षित और सुविधाजनक विकल्प के रूप में देख रहे हैं। इससे न केवल ग्राहकों के लिए भुगतान आसान हुआ है, बल्कि कारोबारियों के लिए भी लेनदेन का रिकॉर्ड और वित्तीय पारदर्शिता बढ़ी है।
■ UPI सर्विस प्रोवाइडर Paytm पर अब अंतरराष्ट्रीय मोबाइल नंबर का इस्तेमाल करके UPI लेनदेन करने की सुविधा शुरू हो गई है। यह नई UPI पेमेंट व्यवस्था फिलहाल सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, हॉन्ग कॉन्ग, ओमान, कतर, अमेरिका, सऊदी अरब, यूएई, यूके, फ्रांस और मलेशिया जैसे करीब 12 देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए उपलब्ध होगी। इस सेवा को नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने मंजूरी दी है।
*इस साल धनतेरस पर UPI ने नया रिकॉर्ड बनाया है, जिसमें 18 अक्टूबर को 1.02 लाख करोड़ रुपये के लेन-देन हुए और 75.4 करोड़ ट्रांजैक्शन दर्ज किए गए। यह अब तक का किसी एक दिन में सबसे बड़ा UPI लेनदेन का आंकड़ा है, जो भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था में बढ़ती हिस्सेदारी को दर्शाता है।*
