मातृभाषा के रूप में हिन्दी विश्व में दूसरे स्थान पर गौरवान्वित है : डॉ अनिल कुमार दीक्षित

Dehradun.

14 सितम्बर का दिन हम सभी के लिए अत्यंत गौरव का विषय है, क्योंकि इसी दिन 1965 में भारतीय संविधान ने हिन्दी को राजभाषा का दर्जा प्रदान किया था।
भारतीय संकलन सिमिति द्वारा हिन्दी दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में अध्यक्षिय उदबोधन करते हुए उत्तरांचल विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अनिल कुमार दीक्षित नें कहा कि विश्व की एकमात्र वैज्ञानिक भाषा हिन्दी केवल संवाद का माध्यम ही नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और अस्मिता का जीवंत प्रतीक है।
डॉ दीक्षित नें कहा कि देवनागरी लिपि से अलंकृत हिन्दी 1000 वर्ष पुरानी है और संस्कृत से जुड़ कर इसका 5000 वर्ष का इतिहासिक महत्त्व हो जाता है
नई शिक्षा नीति 2020 में भी हिन्दी को विशेष गौरव स्थान दिया गया है

आज के वैश्वीकरण के युग में जब अनेक भाषाएँ और संस्कृतियाँ एक-दूसरे से जुड़ रही हैं, सोशल मीडिया में हिन्दी बोल-चाल की भाषा 6% के विकास दर से देश दुनियां में परिलक्षित हो रही है, मातृभाषा के रूप में हिन्दी हमें एकता के सूत्र में पिरोती है और राष्ट्र की आत्मा से जोड़ती है।

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