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मुख्य अतिथि डॉ. संदीप की गरिमामयी उपस्थिति में 9 कन्याओं का हुआ सामूहिक विवाह

रामगढ़ में भव्य “कन्या विवाह महोत्सव एवं राममय मेला” का आयोजन

मुख्य अतिथि डॉ. संदीप की गरिमामयी उपस्थिति में 9 कन्याओं का हुआ सामूहिक विवाह

झाँसी। सामाजिक समरसता और सनातन परंपराओं के अनुपालन का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करते हुए श्री रामायण सरकार ओरेछा धाम के आशीर्वाद एवं श्री सखी के हनुमान की अनुकम्पा से रामगढ़ स्थित श्री शिव मंदिर परिसर (खसरा जेल प्लाजा के पास) में “कन्या विवाह महोत्सव एवं राममय मेला” का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। इस पुनीत अवसर पर 9 कन्याओं का वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य विधि-विधानपूर्वक सामूहिक विवाह सम्पन्न कराया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण एवं कलश स्थापना के साथ हुआ। आचार्यों के सान्निध्य में वर-वधुओं ने अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लिए। टीका, परिक्रमा और विदाई की रस्मों के साथ वातावरण भावुकता और उल्लास से परिपूर्ण हो उठा। उपस्थित जनसमूह ने नवदम्पतियों को आशीर्वाद देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित डॉ. संदीप सरावगी ने अपने उद्बोधन में कहा कि सामूहिक विवाह जैसे आयोजन सामाजिक सहयोग, संस्कार और सेवा भाव की जीवंत मिसाल हैं। उन्होंने कहा कि कन्यादान भारतीय संस्कृति में महादान माना गया है और ऐसे आयोजनों से जरूरतमंद परिवारों को संबल प्राप्त होता है। डॉ. सरावगी ने आयोजकों के इस सराहनीय प्रयास की प्रशंसा करते हुए भविष्य में भी हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।

कार्यक्रम के आयोजक पुजारी कालीचरण महाराज ने बताया कि यह महोत्सव प्रतिवर्ष आयोजित किया जाता है, जिसका उद्देश्य समाज में समरसता स्थापित करना और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की कन्याओं का सम्मानपूर्वक विवाह संपन्न कराना है। उन्होंने सभी सहयोगियों, दानदाताओं और उपस्थित श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया।

राममय मेले के अंतर्गत भजन-कीर्तन, प्रसाद वितरण एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन हुआ, जिससे संपूर्ण वातावरण भक्तिरस में सराबोर रहा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया। समारोह के समापन पर नवविवाहित जोड़ों को गृहस्थ जीवन के आवश्यक उपहार प्रदान किए गए। विदाई के समय परिजनों की आंखें नम थीं, वहीं वीरू भईया और अंय समाजसेवियों के इस पुनीत कार्य से हृदय गर्व और संतोष से परिपूर्ण दिखाई दिए। यह आयोजन न केवल सामाजिक सहयोग की प्रेरणा बना, बल्कि भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों की पुनर्स्थापना का सशक्त संदेश भी दे गया।

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