माधौगढ़। अन्ना जानवरों की समस्या पर आयोजित गोष्ठी में जिलाधिकारी ने किसानों और क्षेत्र से आये प्रधानों को हरसंभव मदद देने का भरोसा दिलाया। अन्ना पशुओं की जटिल समस्या को प्रशासन और किसान दोनों लोग मिलकर ही हल कर सकते हैं। डीएम ने अन्ना पशुओं पर आयोजित विचार गोष्ठी में समस्या और सुझाव दिनों पर अपनी बात रखते हुए किसानों को आश्वस्त किया कि प्रशासन उनके साथ है।
स्व.बहादुर सिंह सभागार में ‘अन्ना जानवरों पर समस्या और सुझाव’ गोष्ठी में आये जिलाधिकारी मन्नान अख्तर ने किसानों से कहा कि लोगों को प्रेरित कर जानवर न छोड़ने की सलाह दी,इसके लिए गांव-गांव में राजस्व और पुलिस के अधिकारी मौजूद रहेंगे। प्रधानों से कहा कि 50 हजार मनरेगा और 14वें वित्त से अन्ना जानवरों पर खर्च कर सकते हैं,जिसके माध्यम से लोकल गौशाला बनाई जा सकती है। ब्लेड बाले तार पर सख्ती दिखाई,तो घायल जानवरों के इलाज की लापरवाही पर पशु अस्पताल के डॉक्टर पर एसडीएम को कार्यवाही करने के आदेश दिए। क्षेत्र में रामपुरा, कंझारी गौशाला निर्माणाधीन है,जबकि ऊंचा भीमनगर में जगह मिल गयी है। शासन को जल्द भेज कर स्वीकृत कराने का प्रयास किया जाएगा।
वहीं एसपी अरविंद चतुर्वेदी ने कहा कि किसानों को जागरूक करने का प्रयास किया जाएगा,वहीं ब्लेड बाले तारों को बेचने बाले और खरीदने बाले दोनों लोगों पर कार्यवाही की जाएगी। गोष्ठी को एसडीएम मनोज सागर,प्रधान संघ के जिलाध्यक्ष अजय दीक्षित,विधायक प्रतिनिधि महेश सिंह,पूर्व प्रधानाचार्य अमर सिंह अटागांव आदि ने संबोधित किया जबकि कार्यक्रम का संचालन प्रिन्स द्विवेदी ने किया।
इस दौरान तहसीलदार कर्मवीर सिंह,मंडल अध्यक्ष शत्रुघन सिंह,राजकिशोर गुप्ता चैयरमैन,विनय प्रताप सिंह,कोतवाल रामसहाय,मंसूर खान,मनीष आर्य,अमित बादल सहित सभी ग्राम प्रधान,जनप्रतिनिधि,चौकीदार आदि लोग उपस्थित थे।
पशु अस्पताल का डीएम ने किया निरीक्षण
जिलाधिकारी ने अन्ना पशुओं से संबंधित गोष्ठी के बाद पशु अस्पताल का निरीक्षण किया। खामियां होने के कारण पशु चिकित्साधिकारी को अल्टीमेटम दिया गया।
डीएम मन्नान अख्तर ने माधौगढ़ स्थित पशु अस्पताल का निरीक्षण किया। वहां की व्यवस्थाएं देखकर डीएम का पारा चढ़ गया। डॉक्टर एन के शर्मा को परिसर स्थित शौंचालय न होने पर कड़ी फटकार लगाई। जिस पर डॉक्टर ने धन अभाव की बात बताई,जिस पर उन्होंने एसडीएम को नगर पंचायत से तत्काल टॉयलेट बनवाने को कहा। घायल पशुयों को समुचित इलाज देने का भी आदेश दिया। स्टाफ की कमी पर शासन को लिखने की बात कही। अस्पताल में डॉक्टर के अलावा महज एक दिव्यांग चपरासी ही तैनात है।
