लखनऊ: परिवहन निगम ने हटाईं 1936 खटारा बसें। समय पूरा कर चुके वाहनों को हटाने के आदेश के चलते, परिवहन निगम की 1936 बसें अब तक बेड़े से हटा दी गईं हैं। इससे यात्रियों को खासा परेशानी बढ़ गई है, अब उनकी जगह प्राइवेट बसें ले रही हैं, जो कि प्रतिबंधित हैं, फिर भी अवैध तरीके और प्रशासन और पुलिस की मिलीभगत से चल रही हैं।
विभाग का दावा है कि 650 बसों की बॉडी बन रही है। इन्हें जल्द ही बेड़े में शामिल किया जाएगा। इससे यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है। पैसेंजर ट्रेनों के बंद होने के बाद यात्रियों के लिए सरकारी बसें आवागमन का सबसे बड़ा जरिया हैं। लेकिन, इधर पुरानी बसों को बेड़े से हटाने से अधिकतर डिपो में बसों का संकट हो गया। करीब 1025 नई बसें बेड़े में शामिल हुईं, फिर भी करीब 900 बसों का गैप है। इसका खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। मुरादाबाद के यात्री विनोद कुमार कहते हैं कि बस कम होने का असर रात्रि सेवा में आया है। बरेली, अमरोहा, संभल आदि के लिए बसें कम मिल रही हैं, पूर्वांचल और उत्तरी उत्तर प्रदेश में प्राइवेट बसों का बोलबाला बढ़ता ही जा रहा है, पर सरकार इसे ना रोक कर, परिवहन निगम की बसें घटा कर प्राइवेट बसों को और योगदान प्रदान कर रहा है।
*लखनऊ: सपा का दो दिवसीय कार्यकर्ता प्रशिक्षण शिविर बुधवार से* सपा का कार्यकर्ता प्रशिक्षण शिविर बांदा में 16 व 17 अगस्त को चलेगा। पहले दिन सपा महासचिव शिवपाल सिंह यादव और दूसरे दिन सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों से सीधे रूबरू होंगे। सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल 16 अगस्त को प्रथम सत्र की शुरुआत करेंगे। पहले दिन लोकतंत्र का भविष्य, जातीय जनगणना, सोशल मीडिया, वर्तमान सरकार में किसानों की स्थिति समेत कई विषयों पर वक्ता अपने विचार भी रखेंगे। 17 अगस्त को समाजवादी पार्टी और लोकसभा चुनाव-2024 पर चर्चा होगी। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के संबोधन के साथ प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन होगा। सपा प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल ने राज्य मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर जिलों में जिलाध्यक्ष, महानगर अध्यक्ष, सांसद, विधायकों द्वारा दर्ज कराई गईं आपत्तियों के आधार पर, बूथों में परिवर्तन एवं संशोधन कराने की मांग की है। ज्ञापन में कहा गया कि निर्वाचन क्षेत्रों में कई बूथों को भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों के विपरीत बना दिया गया है। आरोप है कि सपा के परम्परागत मतदाताओं वाले पोलिंग स्टेशनों को छह किमी तक दूर कर दिया गया है। घनी आबादी के बीच, रेलवे लाइनों, बड़ी नहरों, बड़े नालों के पार पोलिंग स्टेशन बनाये गए हैं। यहां पहुंचने में मतदाताओं को परेशानी होगी। ज्ञापन में लखनऊ समेत गाजियाबाद, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच तथा अम्बेडकरनगर क्षेत्र के बूथों में सुधार के लिए सुझाव दर्ज कराए गए हैं।
