नई दिल्ली 27 सितंबर सुप्रीम कोर्ट ने आज एक बड़ा फैसला दिया है। व्यभिचार कानून को लेकर दिए गए स्पेशल में कहा गया कि विवाहेत्तर संबंध अपराध नहीं है। कोर्ट ने एकमत से आईपीसी की धारा 497 को खारिज कर दिया।
बेंच ने कहा कि किसी भी तरह से महिला के खिलाफ असम्मन जनक व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जा सकता हमारे लोकतंत्र की खूबी मैं हम और तुम में है।
जस्टिस दीपक मिश्रा ने अपना और जस्टिस एम खानविलकर का फैसला सुनाया. जिसके बाद अन्य तीन जजों जस्टिस नरीमन, जस्टिस चंद्रचूड़, जस्टिस इंदू मल्होत्रा ने भी इस फैसले पर सहमति जताई.
कोर्ट ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ किसी भी प्रकार का गलत व्यवहार नहीं किया जा सकता। पति महिला का मालिक नहीं हो सकता है।
क्या है व्यभिचार कानून -158 साल पुरानी आईपीसी की धारा-497 के तहत अगर कोई शादीशुदा पुरुष किसी अन्य शादीशुदा महिला के साथ आपसी रजामंदी से शारीरिक संबंध बनाता है तो उक्त महिला का पति एडल्टरी (व्यभिचार) के नाम पर उस पुरुष के खिलाफ केस दर्ज करा सकता है. हालांकि, ऐसा व्यक्ति अपनी पत्नी के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर सकता है और न ही विवाहेतर संबंध में लिप्त पुरुष की पत्नी इस दूसरी महिला के खिलाफ कोई कार्रवाई कर सकती है.
