अंतरराष्ट्रीय संस्था “हिन्दी साहित्य भारती” की कार्यकारिणी का हुआ पुनर्गठन!
भारतीय जीवन दर्शन, सांस्कृतिक पहचान,भाषायी साहित्य और चिरपुरातन सनातन धर्म के गौरवपूर्ण मूल्यों को सम्पूर्ण राष्ट्र में नहीं अपितु वैश्विक मंच तक प्रभावी तौर पर संप्रेषित करने, वसुधैव कुटुंबकम की उदात्त भावना को संचारित कर विश्व शान्ति और सौहार्द को फलीभूत करने की व्यापक संकल्पना के लिए समर्पित होकर कार्यरत अंतरराष्ट्रीय संस्था “हिन्दी साहित्य भारती” की शुरूआती दौर से गठित कार्यकारिणी का पुनर्गठन करते हुवे देश-विदेश के विविध आयामों से सम्बंधित प्रखर विद्वत जनों को शामिल कर वृहद संगठनात्मक विस्तार किया गया है।
दस सदस्यीय मार्गदर्शक मंडल के संरक्षण में संस्था के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉक्टर रवींद्र शुक्ल ( पूर्व शिक्षा मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार) ने अपने पर्यवेक्षण में देश भर से दस उपाध्यक्ष , महामंत्री, महामंत्री संगठन, सह संगठन महामंत्री, संयुक्त महामंत्री, दस मंत्री, कोषाध्यक्ष सहित 111 सदस्यीय कार्यकारिणी सदस्यों को नामित कर उनके दायित्वों का भी आवंटित किया है।
उल्लेखनीय है कि संस्था अपने सूत्र वाक्य” मानव बन जाए जग सारा, यह पावन संकल्प हमारा” की मूल अवधारणा पर काम करते हुवे वर्ष 2020 में अपने औपचारिक गठन के बाद मात्र पांच साल की सीमित समयावधि में ही देश-विदेश में अपनी पहचान सुस्थापित करने में सफल रही है! अनवरत अपने वार्षिक अंतरराष्ट्रीय अधिवेशन क्रमशः दिल्ली-झांसी- प्रयाग राज महाकुंभ परिसर में आयोजित कर देश भर के राज्यों, केन्द्र शासित प्रदेशों और 37 विभिन्न देशों में कार्यरत संस्था के प्रतिनिधि पदाधिकारियों की सहभागिता से अनेक रचनात्मक आयामों पर काम करने में सफल हो पाई है। चाहे बीते दिनों विश्व हिन्दी सम्मेलन फिजी में संस्था के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉक्टर रवींद्र शुक्ल के नेतृत्व में संस्था के प्रतिनिधिमंडल को प्रतिभाग करने के सुअवसर की बात हो या फिर बीते वर्ष मुम्बई में आयोजित सांस्कृतिक आयोजन” सबके राम शाश्वत श्रीराम!” को गिनीज बुक में स्थान मिलने की बात हो, संस्था ने अपनी अनेक सांस्कृतिक, साहित्यिक, भाषायी और राष्ट्र भाषा के रूप में हिन्दी की प्रतिष्ठापना के उद्देश्यों पर प्रभावी पहल की है। महामहिम राष्ट्रपति को ज्ञापन देने हेतु देश-विदेश से हजारों प्रबुद्ध जनों से संकल्प पत्र हस्ताक्षरित करवाए हैं।
संस्था की वैदेशिक कार्यकारिणी की अध्यक्षता डॉक्टर संजय झा को सौंपी गई है जबकि महामंत्री का दायित्व ब्रिटेन (लंदन) के डॉक्टर इन्द्र चारण को तथा महामंत्री संगठन की जिम्मेदारी कनाडा निवासित वैभव वैद्य को दी गई है।
संस्था की नव गठित कार्यकारिणी में जहां आध्यात्मिक जगत के पूज्य स्वामी डॉक्टर शाश्वतानंद गिरी- महामण्डलेश्वर सरीखे विद्वत जन शामिल हैं वहीं पूर्व राज्यपाल डॉक्टर कप्तान सिंह सोलंकी, पूर्व रक्षा सचिव व निवर्तमान राज्यपाल डॉक्टर शेखर दत्त की विशिष्ट योग्यता को भी वरण किया गया है।पूर्व प्रधान मंत्री स्वर्गीय अटल जी के वैज्ञानिक सलाहकार व प्रख्यात वैज्ञानिक डॉक्टर ओम प्रकाश पांडेय सहित विभिन्न ख्यातिलब्ध विश्व विद्यालयों के मौजूदा व निवर्तमान कुलपतियों यथा- डॉक्टर वैद्य नाथ लाभ, पद्म श्री प्रोफेसर अरविंद कुमार, प्रोफेसर अरूण दिवाकर नाथ वाजपेयी की भी सहभागिता ली गई है। दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित हंसराज कालेज की प्राचार्या डॉक्टर रमा, दो दर्जन महाकाव्यों के रचनाकार आचार्य देवेंद्र देव, देश के जाने माने साहित्यकार व गीतकार डॉक्टर बुद्धि नाथ मिश्र, प्रोफेसर एस तकमणि अम्मा ( केरल), डाक्टर एन लक्ष्मी प्रिया (अंडमान ), डाक्टर मंजू पांडे(उत्तराखंड),डाक्टर वन्दना द्विवेदी(उत्तर प्रदेश),प्रोफेसर रजनी बाला( जम्मू-कश्मीर), डाक्टर नरेश मिश्र ( हरियाणा),डाक्टर सुमित(दिल्ली), राजेन्द्र कुमार सोनी( मुम्बई), डाक्टर निर्मला देवी( विशाखापट्टनम) राम निवास शुक्ल ( उत्तर प्रदेश) , महेंद्र सुराना (महाराष्ट्र), पद्म श्री डाक्टर विष्णु पंड्या ( गुजरात) को विभिन्न पदीय दायित्व निर्धारित किए गये हैं।संस्था के स्तर से नियमित संचालित किये जा रहे विविध आयोजनों यथा- राष्ट्र वंदन अतीत का अभिनन्दन/ राष्ट्र वन्दन वर्तमान का अभिनन्दन के जरिए देश-विदेश के कवि- साहित्यकारों की प्रतिभा का आंकलन कर प्रोत्साहित किया जाता है । हर मंगलवार की शाम को आयोजित विचार श्रंखला” सबके राम शाश्वत श्रीराम ” के अन्तर्गत मर्यादापुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जीवन दर्शन पर केंद्रित विषय विशेषज्ञ का उद्बबोधन सतत् जारी है।संविधान के स्वरूप में यथा उल्लिखित इंडिया शब्द को विलोपित कर भारत शब्द अंगीकार करने हेतु भी संस्था प्रयासरत है। हिन्दी साहित्य के साथ ही विभिन्न भारतीय भाषाओं के उत्कृष्ट साहित्य का स्तरीय अनुवाद कराए जाने, संस्था की अपनी अंतरराष्ट्रीय स्तर की पत्रिका का प्रकाशन भी प्रगति पर है। संस्था के मंत्र मुग्ध कर देने वाले ध्येय गीत के संगीतमय प्रस्तुति ने देश-विदेश में अभूतपूर्व कीर्ति पाई है। अंतरराष्ट्रीय संस्था हिन्दी साहित्य भारती के अध्यक्ष डॉक्टर रवींद्र शुक्ल ने सभी नव पदधारियों से आव्वाहन किया है कि मांभारती के चरणों में समर्पित वैश्विक मंच को और गौरवपूर्ण पहचान दिलाने और रचनात्मक आन्दोलन को सफल बनाने में अपना समर्पित योगदान प्रदान करें।
यह जानकारी हिन्दी साहित्य भारती( अंतर्राष्ट्रीय) के जन संचार प्रकोष्ठ के संयोजक आनन्द उपाध्याय ( सुपरिचित साहित्यकार व स्वतंत्र पत्रकार) ने लखनऊ में जारी एक विज्ञप्ति के माध्यम से दी है।