केंद्र से अलग होने के दांव में क्या उपेंद्र कुशवाहा खुद फंस जाएंगे? रिपोर्ट नैना

नई दिल्ली 10 दिसंबर केंद्र की एनडीए सरकार को आखिरकार राष्ट्रीय लोक समता पार्टी ने टाटा बाय बाय कह दिया। पार्टी के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने सोमवार को केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दे दिया। कुशवाहा ने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया है उन्होंने मोदी पर जमकर भड़ास भी निकाली।

यह मीडिया से बातचीत में कुशवाहा में भाजपा और नरेंद्र मोदी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धोखा देने की आदत है । उन्होंने कहा कि आपके नेतृत्व द्वारा धोखे दिए जाने से मैं निराश हूं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार की प्राथमिकता गरीबों के लिए काम करना नहीं बल्कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों से निपटने की है।

हालांकि उपेंद्र कुशवाहा के इस्तीफे को लेकर बिहार की राजनीति में असर पड़ने की संभावना व्यक्त की जा रही है इस बीच कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने उपेंद्र कुशवाहा को अपने निर्णय के लिए बधाई दी है।

उन्होंने कहा, ‘‘सत्ता को सच बताने के लिए, कुशवाहा जी को मुबारकबाद। आइये, एक नव भारत का निर्माण करें।

उपेंद्र कुशवाहा के इस्तीफे के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या उन्होंने यह निर्णय जेडीयू और भाजपा के बीच बिहार में हुए गठबंधन के खिलाफ लिया है या फिर वह 2 सीटें मिलने के भाजपा की ओर से दिए जा रहे संकेत के बाद से ही अपना दवा बनाने की रणनीति पर काम कर रहे थे।

आपको बता दें कि इन दिनों बिहार की राजनीति में तेजी से समीकरण बदल रहे हैं एक तरफ जहां नीतीश अपने साथ भाजपा को मजबूत गठबंधन में बांधने की कवायद कर रहे हैं तो वहीं तेजस्वी यादव महागठबंधन में ज्यादा से ज्यादा संख्या बल जुटाने के लिए दलों को आमंत्रित कर रहे हैं। राजनीतिक जानकार मान रहे हैं कि बिहार की राजनीति में उपेंद्र कुशवाहा कहीं मांझी की तरह राजनीतिक रास्ते पर तो नहीं चल रही है?

आखिर उपेंद्र कुशवाहा ने अपने तरकश से यह तीर क्यों छोड़ा, यह तो आने वाले समय में पता चलेगा, लेकिन इतना तय है कि एनडीए में अब साथ छोड़ने वालों की संख्या में धीरे धीरे बढ़ोतरी हो रही है।

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