कोंच (जालौन)।* प्रख्यात संत चित्रकूट के कामदगिरि मुख्य द्वार के पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामस्वरूपाचार्य महाराज ने नदीगांव में चल रही रामकथा में प्रवचन करते हुये कहा, स्वयं परमात्मा कहता है कि मनुष्य रूप बहुत ही जतन के बाद प्राप्त होता है अत: इसका सदुपयोग करना चाहिए।
कथा मंच से उन्होंने कहा, जिसमें पशुओं को भी मनुष्य बनाने की क्षमता है वही राम है और जो मनुष्य को पशु बना दे वह रावण। रावण ने अपनी दुष्प्रवृत्तियों से मनुष्य को पशु बनाया किंतु राम ने पशुओं को मानवीय गुण सिखाए। उन्होंने रामत्व और रावणत्व का भेद बहुत ही सुंदर शब्दों में बताया, कहा कि रावण ने अपने मामा मारीच को स्वर्ण मृग बनने के लिए विवश कर दिया अर्थात् मनुष्य को पशु बना दिया, जबकि राम ने वानरों को मानवोचित गुणों से भरते हुए उनको मनुष्य बना दिया। राम का आविर्भाव ही सुख का सूचक है। भगवान हमेशा दूसरों के कल्याण की सोचते हैं जबकि व्यक्ति केवल स्वयं के बारे और अपने ही कल्याण के बारे में सोचता है। कलयुग में राम कथा ही एक मात्र कामधेनू है जिसके श्रवण से मानव का मन क्रम वचन सब शुद्ध हो जाता है। शतचंडी यज्ञ एवं राम कथा सुनने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ यज्ञ मंडप में पहुंच रही है। आयोजन में महंत किशोर दास देवजू महाराज वृंदावन धाम ने भी भक्तों को आशीर्वचन दिया। उन्होंने मां हरिशंकरी माता के दर्शन किए और समूचे धर्म परिसर में अच्छी व्यवस्थाएं देख प्रसन्नता व्यक्त की। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने यज्ञ मंडप की परिक्रमा की। सुबह शाम यज्ञ आचार्य पंडित आशीष महाराज द्वारा विधि विधान से पूजा अर्चना और हवन करवाया जा रहा है। यज्ञ वेदी पर बैठे यजमान पूरे श्रद्धा भाव से हवन पूजन और आरती कर रहे हैं। इस दौरान ब्लॉक प्रमुख अर्जुन सिंह परिहार, समाज सेवी अभिमन्यु सिंह डिंपल, चेयरमेन प्रतिनिधि रामस्वरूप कुशवाहा, अनुरुद्ध सिंह परिहार, राजेंद्र सोनी, पीडी सोनी, माता प्रसाद जारोलिया, मुनिया परिहार, सोनू, जीतू, बलराम परिहार, धर्मेंद्र, शैलेंद्र, परमाल ठाकुर, हेमंत यादव, सचिन खरे, गोलू बेहरे, कंछी बेहरे, करण सिंह, देवेंद्र परिहार, हल्के कुशवाहा, पप्पू सोनी, छोटू आदि सहयोग कर रहे हैं। 15 दिसंबर शुक्रवार को मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह सम्मेलन में 151 शादियां होंगी एवं विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
कोंच: परमात्मा कहता है, बहुत जतन के बाद मिलता है मनुष्य रूप, इसका सदुपयोग करो-स्वामी रामस्वरूपाचार्य
