बुविवि के कला संकाय के नव प्रवेशित विद्यार्थियों का अभिविन्यास कार्यक्रम
झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कला संकाय के नव प्रवेशित विद्यार्थियों के अभिविन्यास के पांचवें दिन का कार्यक्रम शुक्रवार को हिंदी संस्थान के डा.वृंदावन लाल वर्मा सभागार में आयोजित किया गया। इसके मुख्य वक्ता और बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो सुरेंद्र दुबे ने कहा कि चोटी पर चढ़ने के लिए विविध मार्ग होते हैं। अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए आपको सतत चलते रहना है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि जीवन का लक्ष्य सदैव ऊंचा बनाएं। कदम कदम धीरे धीरे चलकर लक्ष्य को पूरा करें। खरगोश की तरह नहीं वरन कछुए की तरह।
पूर्व कुलपति प्रो दुबे ने कहा कि लक्ष्य को सदैव ध्यान में रखें। प्रो दुबे ने कहा वैज्ञानिकता के इस दौर में लोग मनुष्यता के मूल्यों से विचलित हो रहे हैं। यह तय करना मुश्किल हो रहा है कि विज्ञान अभिशाप है या वरदान।
उन्होंने हिटलर से जुड़ी एक कथा का उदाहरण देते हुए कहा कि सृजनकर्ता कभी विध्वंस नहीं करता है। उन्होंने चंद्रयान तीन का उदाहरण देते कहा कि रचनाकार या साहित्य सृजनकार के मन में हिंसा का कोई स्थान नहीं होता है। उन्होंने बुंदेलखंड क्षेत्र के साहित्यिक हस्तियों को याद करते हुए हिंदी विभाग की स्थापना की परिस्थितियों का जिक्र किया।
दो राजाओं की कहानी सुनाकर बताया कि बढ़ा हुआ आत्मबल कैसे युद्ध के परिणाम को बदल देता है। उन्होंने कहा कि आत्म विश्वास ही हर सफलता की कुंजी है। हर व्यक्ति में
परमात्मा है। अपने परमात्मा को जाग्रत कीजिए। सफलता आपका वरण करेगी
उन्होंने रानी लक्ष्मीबाई के शौर्य और साहस
को रेखांकित किया।
उन्होंने कहा कि आज का समय बहुत आगे निकल आया है। हम कहते थे चंदा मामा दूर के। अब प्रधानमंत्री जी ने चंद्रयान तीन की सफलता के बाद नारा दे दिया है कि चंदा मामा टूर के। उन्होंने बताया कि बुंदेलखंड के दो विद्यार्थी इस चंद्रयान अभियान में शामिल हैं। उनका नाम सम्मान से लिया जा रहा है। यह
आज का संकट यह है कि हम मनुष्य की मेधा पर विश्वास करें या मशीन पर। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विकास के सकारात्मक और नकारात्मक प्रभावों का उल्लेख किया। उन्होंने मां सरस्वती को याद करते हुए अपनी बात शुरू की।
बुविवि के कुलपति प्रो मुकेश पाण्डेय ने विद्यार्थियों को आश्वस्त किया कि यह विश्वविद्यालय उनके सर्वांगीण विकास के लिए हर संभव प्रयास करने में जुटा हुआ है। उन्होंने पूर्व कुलपति प्रो सुरेंद्र दुबे के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने प्रो दुबे को शाल ओढ़ाकर और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित भी किया।
शुरुआत में कला संकाय अधिष्ठाता प्रो मुन्ना तिवारी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए सात दिवसीय अभिविन्यास कार्यक्रम की रूपरेखा का ब्यौरा पेश किया। प्रो सौरभ श्रीवास्तव ने विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति फार्म भरने के तौर तरीकों के बारे में जानकारी दी।
इस कार्यक्रम में समाज कार्य संस्थान के डा यतींद्र मिश्र, डा अनूप कुमार, डा. जय सिंह, उमेश शुक्ल, डा. कौशल त्रिपाठी, डा. राघवेन्द्र दीक्षित, अभिषेक कुमार, डा. नेहा मिश्रा, डा. मनीषा जैन, डा. शिप्रा वशिष्ठ, डा. ऋतु सिंह, डा. श्वेता पाण्डेय, डा. अजय कुमार गुप्त, डा. ब्रजेश सिंह परिहार, दिलीप कुमार, संतोष कुमार, डा. अचला पाण्डेय, डा. श्रीहरि त्रिपाठी, डा. प्रेमलता, डा. शैलेंद्र त्रिपाठी, डा. द्युतिमालिनी, डा. शिल्पा मिश्रा, डा. राधिका चौधरी, डा. सुनीता वर्मा, डा. सुधा दीक्षित, डा अनूप कुमार, संतोष कुमार, गजेंद्र सिंह, डा. पुनीत श्रीवास्तव, अतीत विजय, देवेंद्र कुमार समेत अनेक लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन समाज कार्य संस्थान के सहायक आचार्य डा मुहम्मद नईम ने किया। अंत में डा नेहा मिश्रा ने आभार जताया।
