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झाँसी-किसके इशारे पर खरीदा नामांकन, कौन सा खेल खेल रहे गंगा चरण राजपूत? रिपोर्ट-देवेंद्र, रोहित,सत्येंद्र

झाँसी। झांसी ललितपुर संसदीय सीट के लिए भारतीय जनता पार्टी की ओर से प्रत्याशी तय ना किए जाने के बाद भी दावेदारों में शुमार गंगा चरण राजपूत ने आखिर बीते रोज किसके इशारे पर नामांकन पत्र खरीदा। यह सवाल राजनीतिक गलियारे में कल से हलचल किये हुए हैं।

हालांकि राजपूत ने इस बारे में अपना बयान तो दिया है , लेकिन उन्होंने यह साफ नहीं किया कि आखिर नामांकन खरीदने के पीछे उनकी मंशा क्या है? माना जा रहा है कि राजपूत अपनी रणनीति के सहारे पार्टी पर एक दबाव बनाना चाह रहे हैं , तो वहीं कुछ जानकारी मान रहे हैं कि उन्हें पार्टी के किसी नेता ने नामांकन खरीदने के लिए कह दिया था।

झांसी ललितपुर संसदीय सीट इस समय बुंदेलखंड में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बनी हुई है। इस सीट पर समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का संयुक्त प्रत्याशी श्यामसुंदर सिंह यादव मैदान में है ,तो वहीं कांग्रेस के साथ गठबंधन कर मैदान में आने वाली जन अधिकार पार्टी में शिवचरण कुशवाहा को प्रत्याशी बनाया है। सिर्फ भाजपा की ओर से प्रत्याशी की घोषणा किया जाना बाकी रह गई है।

प्रत्याशी के नाम की घोषणा में हो रही देरी ने जहां पार्टी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को उत्सुकता के चरम पर पहुंचा दिया है तो वहीं लोगों को हर पल उभर रहे नामों में से किसी एक नाम का प्रमाणित होने का दावा पेश कर भ्रमित किया जा रहा है ।

बीते रोज कुछ ऐसा ही प्रयास गंगा चरण राजपूत की ओर से किया गया। उन्होंने अचानक ही नामांकन पत्र खरीद लिया । सुबह सोशल मीडिया से लेकर अखबार जगत में जब यह खबर आई तो सभी को चकित रह गए। जान कार मान रहे हैं कि गंगा चरण राजपूत पार्टी में अपना दावा मजबूत बताने को लेकर शायद नामांकन पत्र खरीदने गए थे वहीं कुछ लोग मान रहे हैं कि नामांकन खरीदकर गंगा चरण राजपूत ने पार्टी पर यह दबाव बनाने की कोशिश की है कि यदि उन्हें टिकट नहीं दिया गया तो निर्दलीय भी मैदान में उतर सकते हैं ?

जाति समीकरण को बिगाड़ने और अपने दमखम को प्रदर्शित करने के लिए नामांकन के सहारे गंगा चरण राजपूत की रणनीति राजनीतिक गलियारे में चर्चा का विषय बनी हुई है।

अपने राजनीतिक करियर में कई दलों का चक्कर लगा चुके राजपूत पिछले कई सालों से झांसी ललितपुर संसदीय क्षेत्र में नजर नहीं आए हैं ऐसे में उन्हें पार्टी के अंदर ही पैराशूट प्रत्याशी माना जा रहा है । जान कार कह रहे हैं कि वह उमा भारती खेमे के होने के कारण और लोधी वोटों पर दावा करते हुए अपना पक्ष मजबूत करने में जुटे हैं गंगा चरण राजपूत को यह बात अच्छी तरह पता है कि भारतीय जनता पार्टी झांसी ललितपुर संसदीय सीट के लिए जातिगत समीकरण फिट कर रही है। ऐसे में झांसी और बांदा की सीटों का नाम तय ना हो पाने का एक कारण जातिगत समीकरण का साधना भी है।

बरहाल गंगा चरण राजपूत ने अपनी राजनीतिक सूझबूझ कहै या राजनीतिक खेल की दिशा में चली गई एक चाल, जिसमें नामांकन जैसी प्रक्रिया को अपना कर उन्होंने पार्टी के सामने अपनी मंशा ,दबाव या महत्वाकांक्षा को प्रदर्शित करने में एक और कदम आगे बढ़ाया है ?

हालांकि राजपूत में साफ किया कि उन्होंने नामांकन को सिर्फ नियमों की जानकारी के लिए खरीदा है यदि पार्टी उन्हें टिकट नहीं देती है तो वह चुनाव नहीं लड़ेंगे. इस पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या भाजपा के दूसरे दावेदार नियमों की जानकारी नहीं रखते हैं और क्या वह भी नामांकन पत्र नहीं खरीद सकते थे?

फिलहाल नामांकन खरीदने को लेकर गंगा चरण राजपूत राजपूत के तर्कों को पार्टी के लोगों ने खारिज कर दिए हैं और उन्हें शक के दायरे में ले लिया है।

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