झांसी: मजदूरों का शोषण, पूरी मज़़दूरी नहीं, रिपोर्ट -कलाम कुरैशी

झांसी रेलवे के ठेकेदारों के साथ 17-18 वर्षो से जिन मज़दूरों ने अपना जीवन खपा दिया आज उनकी रोजी रोटी पर बन आयी है। आज उनके शोषण की कहानी सुन कर पूर्व केन्द्रीय ग्रमीण विकास राज्यमंत्री की आंखें भर आयीं। प्रदीप जैन ने कहा कि इन मज़दूरों ने अपनी व्यथा बड़ी अजीबों गरीब है और यह व्यथा केन्द्रीय श्रम आयुक्त को भी सुनना चाहिए और दोषियों को दण्ड दिया जाना चाहिए। मज़़दूरों ने बताया कि ठेकेदार हो या रेल प्रशासन दोनों मिल कर उनका शोषण कर रहे हैं। उनकी समस्या कोई सुनने वाला नहीं है।

मज़दूरों ने बताया कि जितने दिन वो काम करते हैं उतने दिन का उनको वेतन नहीं मिलता है। वेतन मिलता भी है तो न्यूनतम वेतन का भुगतान नहीं किया जाता है और सैकड़ों की सख्या में मज़दूरों को इस वजह से हटा दिया गया कि ठेकेदार का कहना है कि जितना पैसा वो दे रहा है उतने पैसे पर काम करो, न्यूनतम वेतन की बात नहीं करो।

एक मज़दूर ने बताया कि उसको काम पर लगाने के लिए सुपरवाईजर को सतरह हजार रूपये दिए तब काम पर लगाया। ऐसे जाने कितने मज़दूर हैं जिनसे रूपया लेकर उनको काम पर लगाया गया। ऐसे मामलों की जांच होना चाहिए। मज़दूरों ने बताया कि उन को साठ प्रतिशत बोनस का भुगतान किया। 18 माह का बोनस का भुगतान अभी उनको नहीं मिला है। अभी भी साठ प्रतिशत बोनस को वापस किये जाने के लिए उनसे कहा जा रहा है। मजदूरों ने बताया कि उनसे जबरन चंदा लिया जाता है।

प्रदीप जैन आदित्य ने कहा कि मज़दूरों के साथ जो ठेकेदार या प्रशासन अन्याय कर रहा है वो अन्याय मज़दूरों के साथ किसी को भी करने नहीं दिया जायेगा। इन अन्यायों को रोकने के लिए संधर्ष करेंगे। उन्होंने कहा कि हम गांधीवादी तरीका अपना कर हम अपना पक्ष रखेंगे और किसी के हाथ के काम को किसी को छीनने नहीं दिया जायेगा।

अफ़ज़ाल हुसैन, अखलाक मकरानी, मज़हर अली, अनिल रिछारिया, शफीक अहमद मुन्ना, प्रीति श्रीवास, राजकुमार फौजी, हरिओम श्रीवास उपस्थित रहे।

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