Headlines

झांसी महापौर की तरह राजनेता बना ले अपना शेड्यूल, हो सकता है बड़ा बदलाव, रिपोर्ट-देवेंद्र, रोहित,सत्येंद्र

झाँसी। इंसानी जिंदगी पर जब चमकते सितारों की रोशनी कुछ विशेष इनायत करती है, तो वह शख्सियत विशिष्ट हो जाती है। तब आप सामान्य से उठकर माननीय की परिधि में आते हैं और जिंदगी मौका देती है । यहाँ नजीर बनने की दिशा में ये देखा जाता है कि आपकी कर्तव्य परायणता किस दर्जे की है । तभी तो आप की लगन, निष्ठा और समर्पण का भाव ताउम्र आपको विशेष बनाए रखता है।

वैसे तो आज की दौड़ में राजनेता बनना आसान नहीं है, लेकिन सितारों के आगे कुछ भी नामुमकिन नहीं । जिस पर मेहरबान हो कुदरत वह लोगों के लिए यकायक ही सही विशिष्ट बनकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने सामने आ ही जाता है ।

राजनीति हो या समाज सेवा । दोनों ही क्षेत्र में उपलब्धियां हासिल करने का मौका सुनहरा होता है। वर्तमान में भले ही राजनीति स्वार्थ की चादर में लिपटकर अपने सुनहरे पलों को गवा देती हो, लेकिन यह हकीकत है कि इन पलों को यदि सीमा के अंदर समर्पण से निभाया जाए तो संवैधानिक पद पर बैठने से पहले हम जो बदलाव की शपथ लेते हैं उसको साकार करने का हमें पूरा मौका मिलता है।

इस मौके को पूरी तन्मयता के साथ निभाने के लिए तत्पर महापौर रामतीर्थ सिंघल झांसी ही नहीं बल्किप्रदेश और देश के राजनीतिक परिदृश्य में एक नजीर साबित हो रहे हैं । अपनी दिनचर्या का शुरुआत वह कुछ इस तरह तैयार करते हैं, जिसमें पूरे दिन उन्हें अपने लिए कुछ हासिल करने का कोई कॉलम नहीं बनाना पड़ता है , लेकिन समाज देश और लोगों की सेवा की जिम्मेदारी का हिस्सा वह शिद्दत पूरा करने की कोशिश करते हैं ।

वैसे जिंदगी में विशिष्टता आने के बाद लोगों के पास अक्सर समय का अभाव और आम लोगों से दूरी का जो दौर शुरूहोता है वह सितारों की दी गई सौगात के समाप्त होने के बाद ही फिर से वापस पाने की होड़ में उलझ जाता है। ऐसे में राजनेता अपने कार्यकाल में शून्यता के सिवा कुछ हासिल नहीं कर पाता है।

यहां बात महापौर रामतीर्थ सिंघल की सक्रियता कि इसके लिए हो रही है क्योंकि वह अपनी सीमाओं से परे जाकर भी जनता की परेशानियों को कम करने की दिशा में अक्सर पहल करते रहते हैं । मामला चाहे सड़क, बिजली, पानी या परियोजनाओं के क्रियान्वयन की हो। वह कोशिश करते हैं कि उनकी भूमिका भले ही उस अधिकारिक दायरे में ना आती हो, लेकिन जनता की आवाज बनने में वह पीछे नहीं रहे।

सुबह से नगर के सभी 60 वार्डों में समस्याओं का एक कॉलम तैयार कर विकास के कार्यों में निरीक्षण और गुणवत्ता की जांच का समय वह अधिकारियों के साथ तय कर लेते हैं। गर्मी के बाद बारिश के मौसम की शुरुआत से पहले महापौर ने नगर के बड़े नालों की सफाई और व्यवस्थाओं का अवलोकन करने का काम आज से शुरू किया।

नट बली नाले की सफाई से लेकर ऐतिहासिक दीवार को बचाने की उनकी सोच अधिकारियों को भी प्रभावित कर गई।

यह निरीक्षण का सिलसिला उनके पूरे दिन की दिनचर्या का पूरा हिस्सा नहीं था। सामाजिक संगठनों के साथ भी वह मिले। स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में अपने शारीरिक दक्षता का भी परिचय दिया।

वैसे तो चुनाव प्रचार में पूरे दिन सक्रिय रहने के बाद महापौर भी थकान का हवाला देकर विश्राम के लिए कुछ समय ले सकते थे, लेकिन उनके स्वभाव में रुकना,थकना शायद नहीं है। सो, वह अनवरत चल पड़े और अपने दायित्वों की पूर्ति में लोगों की समस्याओं को निपटाने का अभियान जारी रखा।

उनकी सक्रियता का ही परिणाम है कि पिछले 10 दिन से सिविल लाइन जैसे इलाके में पानी की समस्या से जूझ रहे लोगों के कंठ गीले हो गए और युवा समाजसेवी राघव वर्मा ने भी अपने संघर्ष को रोकते हुए महापौर का आभार व्यक्त किया।

यहां सवाल यही है कि यदि महापौर रामतीर्थ सिंघल की तरह दूसरे राजनेता भी अपनी दिनचर्या का शेड्यूल जनता की प्रति जवाबदेही को लेकर तैयार कर ले, तो वह दिन दूर नहीं जब हर क्षेत्र स्मार्ट बनाने से पहले ही स्मार्ट नजर आने लगेगा और जनता अपने माननीय को सर आंखों पर बैठाए रखेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *