झांसीः बुन्देली बंधु यानि अपना नंदू आज बाजार मे घूम रहा था। सई बता रयै बहुतई बातैं सुनबे को मिल रई। जीकी को जौ मौ मे आ रई सो कै रयो। हमने कई भी कै जरा बताओ तौ कै कितने प्रत्याशी मैदान मे आ गए।
ससुरे हमई सै सवाल करन लगे। अंदाज भी गब्बर सिंह वाला-बोला, अरे ओ सम्भा, जरा नंदू को बता, कितने आदमी मैदान में आ गए?नंदू क्या बोले। वैसई कम बोलत। चलौ आऔ।
नंदू घूम रहा है। गलियेन में। चौराह पर। चर्चा जितै भी चुनाव की चली नई कै कान लगा दयै।नंदू को आज शहर मे आवाजे सुनायी दई। कोय कैन लगो कै सपा से राहुल भइया आ रयै। नंदू सकुचाऔ। राहुल गांधी? अरे मैंने तो प्रदीप जैन की सुन रखी थी, ई राहुल कहां से टपक पड़े।
नंदू आगै सोचतो, तबई बाबू बोले पड़े। नासपीटे राहुल वे पंजा बारे नई। राहुल सक्सेना। जो कहत रत कि कहो दिल से, अखिलेश फिर से। अखिलेश तो फिर से नई आए, राहुल जरूर फिर से मैदान मे आ गए।
नंदू के कान मे इतनी जोर से कन्टाप भऔ कि बेहोश होन वारौ थौ। बाबू ने बचा लऔ। तो हमाय नंदू की ऐसी है जैसी सुन रयौ वैसी बतात जा रयौ।
वैसे बात सई है। राहुल सक्सेना ही प्रत्याशी बन गये हैं। नंदू की बात सौ प्रतिशत सच्ची है। अब देखौ जाए, तो राहुल सक्सेना, प्रदीप जैन आदित्य, बृजेन्द्र व्यास जानै तीन दल निपट गये। बचे चौथे भाजपाई। कल या परसो वे भी चिल्ला दे कि हमाऔ प्रत्याशी कौन सौ है। नंदू को जो सुनायी दयी उ मंे तो संतोष गुप्ता और रवीन्द्र शुक्ला में से एक को मान लौ।
नंदू की चटखारे आगे बढ़े ताके पहले बता दे राहुल सक्सेना पार्टी मे सीधे नोमीनेट होने वाले प्रत्याशी हो गए।उनकौ नाम लोकल स्तर से भेजौ नई गऔ तौ। सच्ची तो यई है।
तो नंदू को जरा दूसरी जगह जानै। बाकी बाते आके करत।
राम-राम।