कवियों ने रचनाओं से मोहा मन
झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय पुस्तक मेले के पहले दिन कवियों ने बहुरंगी रचनाओं से दर्शकों का मन मोहा।
कवि सम्मेलन की शुरुआत में पन्ना लाल असर ने सरस्वती वंदना पेश की। इसमें हैदर ललितपुरी ने
तुम अपने मुल्क की तहजीब को रुसवा नहीं करना रचना पेश की। कल्याण दास साहू ने रे मन राम राम को रट रे रचना पेश की।
निहालचंद शिवहरे ने एक रचना से युवा पीढ़ी का आह्वान किया कि प्रकृति संग वैलेंटाइन मनाइए। बेटियों को भी एक रचना समर्पित की कि मैं बनी परवाज़ के लिए पेश की।
रामशंकर भारती ने तुम्हारी देह का चंदन अबीर हो जाऊं रचना पेश की।
पंकज अभिराज ने खुशबू के जैसे मुझमें वो भरता चला गया,पागल वो मुझे इश्क़ में करता चला गया रचना सुनाई। एक अन्य रचना जब से मैं अपने हक का तलबगार हो गया, हर शख्स मेरी राह की दीवार हो गया,,, रचना सुनाई।
भगवान सिंह राही ने जब तुम जीवन की धारा में रसमय रसमय हो जाते हो रचना पेश की। महामना राजा दशरथ को यज्ञ समापन होवन पर रचना भी सुनाई।
व्यंग्यकार सत्य प्रकाश सत्य ने भी अपनी रचनाएं पेश की। कवि सम्मेलन का संचालन अर्जुन सिंह चांद ने किया।
इस कार्यक्रम में मेला संयोजक प्रो पुनीत बिसारिया, डा अचला पाण्डेय, सह संयोजक डा श्रीहरि त्रिपाठी, डा सुधा दीक्षित, डा विपिन प्रसाद, डा प्रेमलता, डा सुनीता वर्मा, डा द्युतिमालिनी, उमेश शुक्ल, डा जय सिंह, डा अतुल गोयल समेत अनेक लोग मौजूद रहे।
