झांसीः इसमे कोई शक नहीं कि सपा वाले जोड़तोड़ और पैसा फेकने मे किसी से कम नहीं! बीते रोज अरबन बैंक के सभापति चुनाव मे जिस अंदाज मे भाजपा प्रत्याशी सुधीर सिंह एडवोकेट को जानबूझकर हराया गया, उससे पार्टी के अंदर कई प्रकार के सवाल खड़े हो गये।
अरबन बैंक मे संचालक पद के लिये हुये चुनाव के बाद कल सभापति का चुनाव हुआ। सदस्यो के चुनाव मे भाजपा के पास 7 का संख्या बल था। इससे साफ था कि सभापति भी भाजपा का होगा, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
चुनाव के दौरान जिस प्रकार से वोटिंग हुयी, उसने साफ कर दिया कि सुधीर सिंह को हराने के लिये रणनीति तैयार कर ली गयी थी। यह भी कह सकते है कि शायद किस्मत भी सुधीर का साथ नहीं दे रही थी। इसलिये जब बराबरी के वोट पड़े, तो पर्ची सिस्टम को आजमाना पड़ा।
सुधीर सिंह को हार का सामना क्यो करना पड़ा, इसको लेकर पार्टी से जुड़े लोगो का मानना है कि धनबल ने इस खेल मे अहम भूमिका निभायी। इसके अलावा पार्टी के बड़े नेता ने पर्दे के पीछे से एक ऐसे व्यक्ति को विपक्ष के साथ लगाया, जिस पर शक नहीं किया जा सके। इस व्यक्ति ने वीरेन्द्र के प्रति अपनी वफादारी को पूरी तरह निभाया। यही कारण रहा कि भाजपा के 7 वोट मे से 6 ही सुधीर के पास पहुंचे। यानि एक वोट को पूरी तरह से खरीद कर या दबाव मे मैनेज किया गया!
अरबन बैंक मे सपा का कब्जा होने से प्रदेश सरकार ही नहीं, स्थानीय स्तर पर भी चर्चा है कि क्या पार्टी की हार जीत केवल बड़े नेताओ के नाम तक सीमित रह गयी है? क्यो स्थानीय स्तर के नेता जीत के लिये जोड़तोड़ और विश्वास का माहौल नहीं बना पाते?
भाजपा से जुड़े लोग अब कह रहे है कि भितरघात हुआ। जबकि सबको पता था कि भितरघात होने की पूरी संभावना है, इसके बाद भी किसी बड़े नेता ने पहल नहीं की, आखिर क्यो ?
प्यार और राजनीति मे सब कुछ जायज की आड़ का नाम देकर जिस अंदाज मे सपा ने सत्ता को ठेगा दिखाया, उससे साफ है कि भाजपाई केवल अपने स्वार्थ के लिये अपनो को कभी भी बलि का बकरा बना सकते हैं?