सुप्रीम कोर्ट एवं एनजीटी के नियमों की उड़ाई जा रहीं हैं धज्जियाँ, समाजवादी पार्टी के समय से सक्रिय खनन माफिया के संरक्षण में चल रहा है पूरा खेल
वैध खनन की आड़ में किया जा रहा है अवैध खनन, माफिया पर दर्ज हैं दर्जनों आपराधिक मामले
टहरौली (झाँसी) – उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था, विकास जैसे विषयों पर खुलकर अपना पक्ष रखने वाली उत्तर प्रदेश की योगी सरकार खनन के मामले पर किस तरह से बैकफुट पर नजर आ रही है इसकी बानगी देखनी हो तो आप झाँसी जिले के देदर में बने अवैध बालू घाट पर चले आईये। देदर में बने अवैध बालू घाट पर खुलेआम, धड़ल्ले से बेतवा नदी का सीना लिफ्टरों, पोकलैंड मशीनों और जेसीबी मशीनों से चीरकर बालू खनन का काम जारी है। दरअसल टहरौली तहसील के ग्राम लुहरगाँव घाट में खनन पट्ट स्वीकृत हुआ था जहाँ पर्याप्त बालू न होने के कारण पट्टा धारकों ने देदर के बड़े खनन माफिया के सहयोग से तहसील क्षेत्र मोठ के देदर से बालू का अवैध खनन चालू कर दिया। जबकि जिला प्रशासन, खनिज विभाग एवं स्थानीय टहरौली और मोठ तहसील प्रशासन पूरी तरह मूकदर्शक बना सब कुछ देख रहा है। आरोप यह भी लग रहे हैं कि यहाँ समाजवादी सरकार में सक्रिय रहे एक खनन माफिया के खुले संरक्षण में एनजीटी के नियमों के विरुद्ध बालू का उठान किया जा रहा है। यह सारा काम जिला प्रशासन, खनिज विभाग एवं टहरौली और मोठ तहसील प्रशासन की जानकारी में हो रहा है क्योंकि खनन का पट्टा सरकार के निर्देश पर जिला प्रशासन ने ही दिया है। ऐसे में सरकार, खनिज विभाग और स्थानीय टहरौली प्रशासन पूरी तरह से आंखें मूंदे हुए है। सुप्रीम कोर्ट एवं एनजीटी के सभी दिशा-निर्देशों को ताक पर रखते हुए बालू खनन के लिए बेतवा नदी की धारा में लिफ्टरों, जेसीबी मशीन और पोकलैंड मशीनों का प्रयोग किया जा रहा है जबकि ठेका देते समय ही किए गए अनुबंध में स्पष्ट रुप से यह उल्लिखित होता है कि नदी की धारा में किसी भी मशीन द्वारा बालू का खनन नहीं किया जा सकता। बावजूद इसके लिफ्टरों, पोकलैंड मशीनों एवं जेसीबी मशीनों के जरिए खनन का काम बदस्तूर जारी है। तस्वीरों में साफ-साफ देखा जा सकता है कि किस तरह से सरेआम सभी नियमों, दिशा निर्देशों की धज्जियाँ उड़ाते हुए नदी की धारा में लिफ्टरों, पोकलैंड मशीनों और जेसीबी मशीन के द्वारा बालू खनन का काम जारी है। समाजवादी पार्टी की सरकार के समय से इस अवैध बालू घाट पर सक्रिय खनन माफिया की हनक के आगे सभी जिम्मेदार अधिकारी बौने साबित हो रहे हैं। इस खनन माफिया के ऊपर दर्जनों आपराधिक मामले दर्ज हैं। अब सवाल यह भी है कि यह खनन वैध है या अवैध है इसकी जांच करने वाला भी कोई नहीं है क्योंकि जब सभी दिशा निर्देशों को ताक पर रख दिया गया हो तो वैध और अवैध का सवाल कौन उठा सकता है? जाहिर तौर पर जिला प्रशासन, खनिज विभाग एवं स्थानीय टहरौली और मोठ तहसील प्रशासन की लापरवाही प्रदेश सरकार के दावों पर पानी फेर रही है।
बोले उपजिलाधिकारी टहरौली :- उपजिलाधिकारी टहरौली अबुल कलाम ने कहा कि उनको बालू के अवैध खनन की जानकारी नहीं है। अगर देदर से बालू का अवैध खनन किया जा रहा है तो वह उपजिलाधिकारी मोठ के संज्ञान में मामला डाल कर कठोर कार्यवाही करवाएंगे। उन्होंने कहा कि देदर मोठ तहसील में आता है जिसके कारण वह उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है।
