झांसीः बसपा मे एक बात तो जग जाहिर है कि कैडर का व्यक्ति ही सर्वोपरि होता है। बात यह नहीं हो रही। बसपा के वर्तमान हालात मे बुन्देलखण्ड मे नेता की काफी कमी नजर आ रही है। ऐसे मे मुख्य जोन संयोजक लालाराम अहिरवार का कद इतना बढ़ गया है कि वो मंच पर बहनजी की तरह सोफे पर विराजमान होने लगे हैं? आज एक समारोह मे लालाराम को देख चर्चा का बाजार गर्म रहा।
बुन्देली माटी मे बसपा का वजूद घटता-बढ़ता की स्थिति मे रहा। लोकसभा से लेकर विधानसभा चुनाव मे जोरदार टक्कर के बाद धराशायी होने की नौबत भी आती रही। पहले तो बड़े नेता थे, सो हालातो को संभाल लेते थे।

नसीमउददीन सिददीकि, तिलक चन्द्र अहिरवार, बृजेन्द्र व्यास, बृजलाल खाबरी जैसे दिग्गज नेताओ के बाहर निकलने से नेता की कमी का संकट तो आया है, लेकिन इस कमी ने कुछ नेताओ के कद मे इजाफा करने का मौका दे दिया।
बसपा मे कद की तलाश कर रहे लालाराम अहिरवार पर पार्टी की जबरदस्त मेहरबानी हुयी है। उन्हे जैसे सर्वाधिकार सुरिक्षत कर दिया गया। हालत यह है कि बुन्देलखण्ड मे बसपा के केन्द्र बिन्दु लालाराम अहिरवार बन गये हैं।
जाहिर है जब कद बढ़ेगा, तो जलवे भी बढ़ेगे। इसकी बानगी भी देखने को मिल रही है। आज बसपा के कार्यक्रम मे वैसे तो स्थानीय नेताओ का जमावड़ा थ। मंच पर आगे और पीछे की पक्ति मे नेता विराजे भी थे। इनमे झांसी विधानसभा मे प्रत्याशी रहे सीताराम कुशवाहा, पूर्व विधायक कैलाश साहू जैसे नेता मंच पर दिखे।इन सभी के लिये सामान्य कुर्सियो का इंतजाम था।
खास था लालाराम अहिरवार का सोफा। गददेदार सोफे पर विराजे लालाराम अहिरवार ने समारोह मे भाजपा को निशाने पर लिया। हालंाकि वो सपाईयो को समारोह मे आमंत्रित करने का मौका नहीं दे पाये। शायद डर यह था कि कहीं जुगलबंदी के चक्कर मे मंच पर अहमियत किसकी कैसी होगी, यह कैसे तय होगा?
