बुंदेलखंड का दंगल सनातन संस्कृति की एक अहम धरोहर है-डॉ संदीप सरावगी

पुरुष एवं महिला भारत केसरी दंगल के मुख्य अतिथि रहे डॉ संदीप सरावगी

हजारों वर्षों पुराना है दंगल, निरोगी काया स्वस्थ शरीर के लिए मूल मंत्र है दंगल-डॉ संदीप सरावगी

बुंदेलखंड की वीर भूमि ऋषियों की तपोभूमि हजारों वर्ष पुराने इस खेल का मूल मंत्र स्वस्थ एवं निरोगी काया के लिए अहम योगदान है तो वह है दंगल, कुश्ती महारानी वीरांगना लक्ष्मीबाई की कर्मभूमि में महानगर के करारी मैं आयोजित स्वर्गीय श्री महावल सिंह व रामबाबू गुर्जर की स्मृति में दो दिवसीय पुरुष एवं महिला भारत केसरी दंगल का आयोजन किया गया।जिसमें कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ.संदीप सरावगी ने सर्वप्रथम स्वर्गीय श्री महावल सिंह व रामबाबू गुर्जर के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर उनको याद किया साथ में विशिष्ट अतिथि रोहित राजपूत,वीरेंद्र सिंह यादव( वीरू) वही डॉ संदीप सरावगी ने अपने वक्तत्व में कहा कि बुंदेलखंड के उन शूरवीरों जिन्होंने कुश्ती दंगल का शुभारंभ कराया। उनके चरणों में नमन बंधन अभिनंदन करते हुए धन्यवाद देना चाहता हूं।उनके शिष्यो एवं परिवार के सदस्य को जो हर वर्ष इस आयोजन को करते चले आ रहे हैं और सनातन की संस्कृति को जीवित रखे हुए हैं। इस दंगल के आयोजक मंडल में दंगल संचालक मेहरबान सिंह यादव,बालजी पहलवान,संजय राय,संजय राजपूत, नीतू राजपूत, ठा. गंधर्व सिंह गुर्जर, चंद्रप्रकाश राय, संजय कुमार तिवारी को भी धन्यवाद देना चाहता हूं जो निरंतर इस आयोजन को हर वर्ष नया रूप देते चले आ रहे हैं। इस दंगल में देश के कोने-कोने से पहलवान अपनी भागीदारी प्रस्तुत करते हैं चाहे वह महिला पहलवान हो या पुरुष अपनी पहलवानी का हुनर दिखाते हैं इस ऐतिहासिक दंगल में प्रथम विजेता को 2 लाख का पुरस्कार एवं द्वितीय विजेता को 1लाख का नगद पुरस्कार दिया गया। दंगल का आयोजन प्रातः 11:00 से रात्रि 8:00 बजे तक हुआ है इससे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि यह ऐतिहासिक और बुंदेलखंड ही नहीं देश का पहला दंगल हो सकता है क्योंकि यह दंगल मातृभूमि की याद दिलाता है क्योंकि इस दंगल में कोई आधुनिक साउंड सिस्टम नहीं कोई आधुनिक व्यवस्था नहीं वही पुरानी संस्कृति के अनुसार मिट्टी लपेड़े हुए खेल भावना के साथ इस दंगल को खेला जाता है हजारों की संख्या में जन समूह इस पुरुष एवं महिला भारत केसरी दंगल के आयोजन को देखने के लिए दूर दराज से भी पहुंचते हैं जिनकी व्यवस्था के लिए आयोजक कमेटी पूरी व्यवस्था के साथ इस धरोहर को बचाए हुए हैं और हर वर्ष इसको नया रूप देते चले आ रहे हैं जो एक सराहनीय है इस मौके पर शैतान सिंह कारारी पूर्व बुंदेलखंड केसरी,
गजेंद्र सिंह गुर्जर पहलवान करारी,
राजवीर सिंह गुर्जर पहलवान, गौरव सेन पहलवान,सत्येंद्र पहलवान बबीना,सोहिल राईन पहलवान बबीना कई दिग्गज पहलवान मौजूद रहे वही संघर्ष सेवा समिति,राजू सेन, सुशांत गेड़ा,राकेश अहिरवार,अभिनय अग्रवाल गोलू,संदीप नामदेव,अनुज, अनिल वर्मा,त्रिलोक भाई आदि उपस्थित रहे

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