भजनों से समाज जागरण: अमरकंटक में अनूठा अभियान

नर्मदा दर्शन के साथ सामाजिक सुधार का संकल्प
भक्ति के सुरों में नशामुक्ति और संस्कारों का संदेश

अनूपपुर (मध्य प्रदेश राजेश शिवहरे) अमरकंट माँ नर्मदा के उद्गम स्थल,पवित्र नगरी अमरकंटक की वादियों में इन दिनों भक्ति,चेतना और सामाजिक परिवर्तन की स्वर-लहरियां गूंज रही हैं,जहाँ एक ओर श्रद्धालु नर्मदा दर्शन कर आध्यात्मिक शांति का अनुभव कर रहे हैं,वहीं दूसरी ओर भजन-कीर्तन के माध्यम से समाज को नई दिशा देने का एक अनुकरणीय प्रयास भी निरंतर जारी है।
छत्तीसगढ़ के ग्राम गोविंदपुर बावनघासी स्थित सखा आश्रम परशुरामपुर से आई भजन-कीर्तन मंडली द्वारा चलाया जा रहा यह अभियान भक्ति और सामाजिक उत्तरदायित्व का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। मंडली के सदस्य गांव-गांव भ्रमण कर भजनों के माध्यम से नशामुक्ति का संदेश दे रहे हैं और समाज को आत्मचिंतन की ओर प्रेरित कर रहे हैं।
मंडली के क्षेत्राधिकारी पुरन सिंह मरकाम ने बताया कि इस मंडली के 32 सदस्य मां नर्मदा के दर्शनार्थ अमरकंटक पहुंचे हैं,उन्होंने कहा कि सभी सदस्य माता राजमोहनी के अनन्य भक्त हैं और उन्हीं की प्रेरणा, मार्गदर्शन एवं आदेश से यह जनजागरण अभियान संचालित किया जा रहा है। भक्ति को साधन बनाकर समाज में व्याप्त कुरीतियों के विरुद्ध जागरूकता फैलाना इस अभियान का मुख्य उद्देश्य है।
भजन-कीर्तन के दौरान न केवल नशामुक्ति का आह्वान किया जा रहा है, बल्कि बच्चों को नियमित रूप से पाठशाला भेजने, शिक्षा के महत्व को समझाने,सनातन धर्म की रक्षा, सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण तथा गौ संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील सामाजिक विषयों पर भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है। भक्ति के सुरों में पिरोए गए ये संदेश सीधे जनमानस के हृदय को स्पर्श कर रहे हैं।
इस आध्यात्मिक-सामाजिक अभियान का स्थानीय लोगों पर सकारात्मक और गहरा प्रभाव देखने को मिल रहा है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु, ग्रामीण,युवा एवं महिलाएं भजन-कीर्तन में सहभागिता कर रहे हैं। लोग न केवल श्रद्धा से भजनों का श्रवण कर रहे हैं, बल्कि उनमें निहित सामाजिक संदेशों को अपने जीवन में आत्मसात करने का संकल्प भी ले रहे हैं।
अमरकंटक की पावन भूमि पर चल रहा यह अभियान यह सिद्ध करता है कि जब भक्ति को सामाजिक चेतना से जोड़ा जाता है, तो वह समाज परिवर्तन का सशक्त माध्यम बन सकती है। आध्यात्मिक साधना के साथ समाज को सही दिशा देने का यह प्रयास न केवल सराहनीय है,बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत भी बन रहा है। 32 सदस्यों के दल में ग्रामीण पुरुष एवं महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में भजन के माध्यम से सामाजिक कुरीतियों को त्यागने समाज जागरण हेतु शिक्षाप्रद संदेश दे रहे हैं इतना ही नहीं अपने आसपास के ग्रामीण क्षेत्र में भी भजन कीर्तन के माध्यम से नशा मुक्ति अभियान शिक्षा के लिए प्रेरणा गोवंश संरक्षण का प्रेरक संदेश देने का कार्य कर रहे हैं

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