नई दिल्ली 9 जुलाईः देश के सबसे बेरहम और दर्दनाक हादसे का शिकार हुयी निर्भया कांड मे आज सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है। दोषी फांसी पर लटकेगे। याचिका खारिज कर दी गयी। इस कांड ने पूर देश को हिला कर रख दिया था। सन 2012 मे हुये गैंगरेप के इस कांड मे पीड़ित निर्भया के अंतिम समय की चिटठी मीडिया मे आयी थी, जिसमे उसने अपनी पीड़ा मां को बतायी थी।
आखिरी समय मे पन्ने पर लिखी गयी निर्भया की दर्दभरी दास्तां आज भी लोगो को कचोटती है। निर्भया ने पत्र मे जो लिखा वो हर शब्द दर्द से भरा था।
पहली चिट्ठी
19 दिसंबर 2012 को निर्भया ने अपनी मां को पहली चिट्ठी लिखी. वह मां को अपनी पीड़ा बताना चाहती थी उसने लिखा कि मां मुझे बहुत दर्द हो रहा है. ये दर्द मुझसे सहा नहीं जा रहा है. मेरी बचपन में डॉक्टर बनने की तमन्ना थी, ताकि मैं लोगों का दर्द दूर कर सकूं. लेकिन मुझे नहीं पता था कि ऐसा दर्द मुझे झेलना पड़ेगा. डॉक्टरों की दवाइयां भी मेरा दर्द कम नहीं कर पा रही हैं. मैं इस दर्द और पीड़ा को सहन नहीं कर पा रही हूं.
दूसरी चिट्ठी
निर्भया ने दूसरा खत 21 दिसंबर 2012 को लिखा था. निर्भया ने मां को लिखा कि मां दर्द की वजह से मैं ठीक से सांस नहीं ले पा रही हूं. सांस लेने में मुझे तकलीफ हो रही है. डॉक्टरों से कहो कि मुझे नींद की दवाई न दें, क्योंकि मैं सोती हूं तो कोई मेरे शरीर को नोचता है. मैं बेबस होती हूं. सोते हुए मैं क्या समझ पाती हूं, मुझे नहीं पता. मेरे आसपास के सारे शीशे तोड़ दो. खिड़की के भी. मैं अपना चेहरा नहीं देखना चाहती.
तीसरी चिट्ठी
निर्भया ने 22 दिसंबर 2012 को अपनी मां को तीसरी चिट्ठी लिखी और कहा कि मैं नहाना चाहती हूं. मेरे शरीर से उन जानवरों की बदबू आ रही है. इससे मुझे अपने शरीर से भी नफरत हो रही है. मुझे छोड़कर मत जाना मां. अकेले में मुझे डर लगता है.
चौथी चिट्ठी
निर्भया ने 23 दिसंबर 2012 को अपनी मां को चौथी चिट्ठी लिखी. इसमें निर्भया ने पूछा कि पापा कहां हैं? वो मुझसे मिलने क्यों नहीं आ रहे? पापा से कहना कि दुखी न हों.
आखिरी चिट्ठी
निर्भया ने अपनी आखिरी चिट्ठी 26 दिसंबर 2012 को लिखी. उसने लिखा कि मां मैं दर्द नहीं झेल पा रही हूं. दर्द सहते-सहते थक गई हूं. मां, मुझे बहुत दर्द हो रहा है. डॉक्टर से कहकर मुझे दवाई दे दो. मैं अब थक गई हूं. मुझे सोना है. मां, मुझे माफ कर देना.
