झांसी । शिया समुदाय ने ईद ए ग़दीर का पर्व बड़े हर्ष उल्लास से मनाया इस मौके पर LBM विद्यालय के सामने राहगीरों को शरबत वितरण किया गया। यह कार्यक्रम झांसी इमामे जुमा सैयद शाने ज़ैदी की सरपरस्ती में शिया समुदाय के युवाओं द्वारा आयोजित किया गया जिसमें मौलाना इक़्तेदार हुसैन रिज़वी साहब भी उपस्थित रहे उन्होंने बताया कि ईद-ए-ग़दीर, जिसे “ईद-ए-विलायत” भी कहा जाता है। यह दिन इस्लाम के इतिहास का वह सुनहरा दिन है जब पैग़म्बर-ए-इस्लाम हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहो अलैहि व आलेही वसल्लम) ने अल्लाह के हुक्म से हज़रत अली (अलैहिस्सलाम) को अपना वसी और खलीफा घोषित किया।
यह वाक़िया 18 ज़िलहिज्जा को घटा जब पैग़म्बर हज के बाद वापस लौट रहे थे। उन्होंने लगभग 1 लाख से ज़्यादा हाजियों को ग़दीर के मैदान में रोका और एक मिम्बर बनवाया। वहाँ उन्होंने सबके सामने हज़रत अली (अ.स) का हाथ उठाकर कहा:
“मं कुनतु मौलाहु फ़हाज़ा अलीय्युन मौला ”
(जिस जिसका मैं मौला हूँ, अली भी उस उसके मौला है।)
यह सिर्फ़ एक दोस्ती या रिश्तेदारी का ऐलान नहीं था, बल्कि यह इमामत और रहबरी का एलान था। यही वजह है कि इस दिन को मुसलमानों के एक बड़े तबके द्वारा सबसे बड़ी ईद माना जाता है।
ग़दीर हमें पैगाम देती है आज जब दुनिया नफ़रत और तफ़रकों से भरती जा रही है, ग़दीर हमें मोहब्बत, इत्तेहाद और हक़ को पहचानने की तालीम देता है। यह दिन हमें सिखाता है कि हमें अपने समाज को अद्ल, अमन और इंसाफ की बुनियाद पर खड़ा करना है।
