सफलता के लिए मन को साधना जरूरी: डा ओमजी उपाध्याय

बुविवि में नव प्रवेशित विद्यार्थियों का सात दिवसीय अभिविन्यास कार्यक्रम शुरू

झांसी। इंडियन काउंसिल आफ हिस्टोरिकल रिसर्च के निदेशक डा ओमजी उपाध्याय ने कहा कि जीवन में सफलता समय और श्रम साध्य होती है। सफलता के लिए सबसे पहले मन को साधना जरूरी है। लक्ष्य तय करने के लिए मन ठीक होना चाहिए। उन्होंने भारत माता के जयघोष से विद्यार्थियों में जोश भी भरा। उन्होंने विवेकानंद के एक प्रसंग को भी सुनाया।
वे सोमवार को बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के गांधी सभागार कला संकाय के विभिन्न पाठ्यक्रमों के नव प्रवेशित छात्रों के सात दिवसीय अभिविन्यास कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में जुटे विद्यार्थियों और शिक्षकों को संबोधित कर रहे थे।
डा उपाध्याय ने कहा कि मन को साधना बहुत बड़ी चुनौती है। उन्होंने विद्यार्थियों से मन को साधने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जीवन कितना बड़ा है यह महत्वपूर्ण नहीं। महत्वपूर्ण बात यही है कि जीवन सार्थक हो। उन्होंने चींटियों का उदाहरण देते हुए उनके श्रम, टीम वर्क की सराहना करते हुए उनसे सीख लेने की सलाह दी।
डा उपाध्याय ने कहा कि विदेशी आक्रांताओं के यहां आने से हमने बहुत कुछ खोया है। कभी हम विश्व गुरु थे लेकिन आक्रांताओं और अंग्रेजों ने हमारी गौरवशाली शैक्षणिक व्यवस्था को तहस नहस कर दिया है। अब उसे सुधारने का मौका हम सबके हाथ आया है। उन्होंने विभिन्न लेखकों के लेखों के जरिए प्राचीन भारत के गौरव का उल्लेख किया। डा उपाध्याय ने कहा कि विद्यार्थियों को अपना लक्ष्य निर्धारित कर उसे प्राप्त करने की पुरजोर कोशिश करनी चाहिए।

इससे पहले सभी अतिथियों ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। सभी अतिथियों का गर्मजोशी से स्वागत किया गया।
कला संकाय के अधिष्ठाता प्रो मुन्ना तिवारी ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने अभिविन्यास कार्यक्रम के महत्व को रेखांकित किया। इस मौके पर हिंदी विभाग में विद्यार्थियों को विशेष प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए विशेष कोचिंग देने के कार्यक्रम की जानकारी दी गई। इसका पोस्टर भी लांच किया गया।
इस कार्यक्रम में कुलपति प्रो मुकेश पाण्डेय ने डा उपाध्याय को स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मानित किया। इस कार्यक्रम में बुविवि के छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो सुनील कुमार काबिया, विद्यार्थी परिषद के प्रांत संगठन मंत्री अंशुल विद्यार्थी, शांतनु अग्रवाल, डा रश्मि सिंह, डा कौशल त्रिपाठी, डा जय सिंह, डा अजय कुमार गुप्त, डा श्रीहरि त्रिपाठी, डा श्वेता पाण्डेय, डा राघवेन्द्र दीक्षित, उमेश शुक्ल, डा ब्रजेश सिंह परिहार, डा सुधा दीक्षित, डा प्रेमलता श्रीवास्तव, डा सुनीता वर्मा, डा ज्योति मिश्र, डा शैलेंद्र तिवारी, डा अनूप कुमार, डा शिप्रा वशिष्ठ, डा भुवनेश्वर, डा पुनीत श्रीवास्तव, अभिषेक कुमार, दिलीप कुमार समेत अनेक लोग उपस्थित रहे। संचालन डा अचला पाण्डेय ने किया।

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