26/11 आतंकी हमला: पीड़ितों को संवेदनायें और शहीदों को श्रृध्दांजलि-आब्दी

26/11 आतंकी हमला: पीड़ितों को हार्दिक संवेदनायें और शहीदों को हार्दिक श्रृध्दांजलि !

शहीद हेमंत करकरे और उन जैसे अन्य बहादुर सुरक्षा कर्मियों के हत्यारे – भारत में आतंकवाद का असली चेहरा !!

आज मुंबई आतंकी हमले की दसवीं बरसी पर मुम्बई ने मरीन लाइंस स्थित पुलिस जिमखाना में शहीदों को श्रद्धांजलि दी, जहां आतंकियों से लड़ते हुए अपने प्राण न्यौछावर वाले पुलिसकर्मियों की याद में एक 26/11 स्मारक बनाया गया है। आज सम्पूर्ण देश और सभ्य समाज भी 26/11 के पीड़ितों और शहीदों को हार्दिक श्रद्धांजलि दे रहा है।

इस हमले के बाद ज़िंदा बचे एकमात्र पाकिस्तानी आतंकवादी अजमल आमिर कसाब को पुणे की यरवदा जेल में 21 नवंबर 2012 को फांसी दे दी गई थी। लेकिन बाक़ी आज भी आज़ाद घूम रहे हैं।

26/11 हमें यह भी याद दिला रहा है कि बात-2 पर अपने ही देश वासियों पर हमला करने और डींगे हांकने वाली पार्टियों और संगठनों के शेरदिल (?) जुमलेबाज़ नेता और कार्यकर्ता किस तरह मुम्बई में चूहों की तरह अपने बिलों मे घुसे रहे थे। आतंकवादियों को मुंह तोड जवाब देने की घर से निकलने की कोई हिम्मत नहीं जुटा सका था। तीन दिन सबको सांप सूंघ गया था। सिवाय बहादुर सुरक्षाकर्मियों के।

एक सच्चे देश भक्त हिन्दुस्तानी होने के नाते हमारा मानना है कि इस हमले में शहीद हेमंत करकरे, अशोक कामटे, विजय सालिस्कर, सन्दीप उन्नीकृष्णन, तुकाराम ओम्बले और उन जैसे अन्य बहादुर सुरक्षा कर्मियों के हत्यारे कौन हैं? इनको क्यों मारा गया ? इसका मास्टर माइण्ड कौन था? जब तक इनका सही पता नहीं चलता, भारत में आतंकवाद का असली चेहरा सामने आ ही नही सकता।

केवल पाकिस्तान, दाऊद इब्राहिम, हाफिज़ सईद, ज़की उर रहमान लखवी, अबु जिन्दाल, इंडियन मुजाहिदीन, लश्करे तैय्यबा आदि आदि कई गुमनाम संगठनों पर आतंकवाद का ठीकरा फोड़ कर इतिश्री कर लेना, न केवल अपने आपको, समाज को और देश को धोखा देना है बल्कि वास्तविकता से आंखें चुराना भी है। ये तो खुले दुश्मन हैं हमारे प्यारे अज़ीम मुल्क हिन्दुस्तान के।

लेकिन आस्तीन के सापों, बगुला भक्त नमक हरामों का क्या? राष्ट्र भक्ति का नक़ली चोला ओढ़े, छ्दम राष्ट्रवादी और उनकी वबाली मंडली, यह भी एक प्रकार के आतंकवादी ही हैं। जाति और धर्म के आधार पर इनका तुष्टीकरण, प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष संरक्षण और समर्थन देश और समाज को हमेशा बहुत मंहगा पड़ा है। यह सब देश की एकता और अखण्डता के दुश्मन हैं। इन पर भी बिना भेद भाव के देर सवेर कठोर कार्यवाही करनी ही होगी।

26/11 आतंकी हमले के पीड़ितों और शहीदों को हार्दिक और सच्ची श्रृध्दांजलि यही होगी कि शहीद हेमंत करकरे, अशोक कामटे, विजय सालिस्कर, सन्दीप उन्नीकृष्णन, तुकाराम ओम्बले और उन जैसे अन्य बहादुर सुरक्षा कर्मियों के हत्यारों और उनके आक़ाओं, जो आज भी आज़ाद घूम रहे हैं, का पता लगाकर उन्हें सरेआम फांसी दी जाये। तभी इन शहीदों की बैचेन आत्मा को शांति मिलेगी।

सभी शहीदों को हज़ारों सलाम।

सैयद शहनशाह हैदर आब्दी समाजवादी चिंतक

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