झाँसी | भ्रष्टाचार के मामले में फंसे सेवानिर्मित प्रशासनिक अधिकारी दीपक कुमार मिश्रा का का विभाग में खास रुतबा रहा है | यही कारण रहा कि वह पिछले 39 सालों से आयुक्त कार्यालय के विभिन्न ने 15 पदों पर तैनात रहा और वहीं से सेवानिवृत्ति हो गया | विभागीय कर्मचारियों का कहना है कि करीब 3 साल पहले दीपक के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत पर शासन से जांच शुरू होने के बाद भी वह महत्वपूर्ण पटलों पर रहा | 3 साल तक चली जांच के बाद उसके पास 55 लाख रुपए की अघोषित आय का खुलासा हुआ था| एसपी विजिलेंस राजेंद्र सिंह ने बताया कि मामला दर्ज कर लिया गया है विवेचना चल रही है |
मंडल आयुक्त कार्यालय में पूर्व प्रशासनिक अवसर दीपक कुमार मिश्रा की तैनाती 10 दिसंबर 1985 में हुई थी| वह यहां पर भूलेख, नजीर सहित करीब 15 पटलो पर दिनांक रहे| इसी दौरान आए से अधिक संपत्ति अर्जित करने की शिकायत की गई| बावजूद इसके दीपक कुमार मिश्रा का रुतबा काम नहीं हुआ | शासन ने विजिलेंस को गोपनीय जांच की आदेश दिए | 3 साल तक चली जांच के दौरान दीपक 31 दिसंबर 2024 को सेवानिर्मित हो गए,| आयुक्त कार्यालय में तैनात कर्मचारियों को कहना है कि दीपक मिश्रा का जब भी पटल परिवर्तन हुआ तो उन्हें संवेदनशील पोस्ट पर ही नियुक्त किया गया|
उधर विजिलेंस थाने में मामला दर्ज होने के बाद अर्थ कार्यालय में तैनात कर्मचारियों में हड़कंप मचा है | जांच में खुलासा हुआ की सबसे अधिक गोलमाल दीपक ने बीमा पॉलिसी के नाम पर किया है|
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39 सालों की नौकरी में दीपक के हुए थे 15 पटल परिवर्तन
