कोंच।* यहां गहोई भवन में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह के अंतिम दिवस कथा व्यास आचार्य मिथलेश दास ने भगवान द्वारिकाधीश और उनके बाल सखा सुदामा के बीच भक्त और भगवान के अटूट संबांधों की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि परमात्मा सर्वज्ञ और सर्व व्यापी है जो बिना मांगे ही सब कुछ दे देता है। जैसा कि सुदामा द्वारा लाए गए तंदुलों में से दो मुट्ठी तंदुल के बदले सुदामा को दो लोकों का ऐश्वर्य प्रदान कर दिया। उन्होंने कहा कि सुदामा निश्छल भक्ति के प्रतीक हैं जिन्होंने अभावों के साथ जीवन यापन स्वीकार किया लेकिन परमात्मा के समक्ष हाथ नहीं फैलाए।
श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह के दौरान अंतिम दिवस की कथा में कथा व्यास ने कहा कृष्ण और सुदामा की मित्रता जीव और परमात्मा के बीच संबंधों की गहराई बताती है। यह प्रसंग निश्छल मैत्री संबंधों के साथ आदर्श मित्रधर्म की भी शिक्षा देता है। इसके साथ ही एक और भी सीख मिलती है कि केवल अपने भाग पर ही भरोसा करना चाहिए, दूसरों का भाग हड़पने वाले को दारिद्र्य भोगना पड़ता है जैसा कि सुदामा ने शिक्षा काल में भगवान कृष्ण के हिस्से के चने खाकर अपने भाग्य में दरिद्रता को आमंत्रित कर लिया था। कथा प्रवाह के बीच बीच अपने सुमधुर कंठ से भजनों की प्रस्तुति पर श्रोता झूम झूम उठे। कथा के अंत में परीक्षित शंभूदयाल सोनी व उनकी पत्नी गीता देवी ने भागवत जी की आरती उतारी, अंत में कथा समापन पर प्रसाद वितरित किया गया।
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कोंच: बिना मांगे ही सब कुछ दे देता है परमात्मा-मिथलेश दास
