झांसी: सड़कों पर उतरकर यूजीसी का पुरजोर विरोध किया सवर्ण समाज ने

झांसी

सवर्ण समाज ने एकजुट होकर यूजीसी का विरोध ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति प्रधानमंत्री को भेजा ।
झाँसी। सवर्ण समाज झाँसी ने एकजुट होकर समस्त सवर्ण वर्ग के घटक साथियों को एक मंच पर लाकर वृहद स्वरूप में इलाईट चौराहा से एक विशाल विरोध यात्रा के रूप में कलेक्ट्रेट पहुंचकर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को सम्बोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा । विरोध प्रदर्शन में सवर्ण समाज के सभी वर्गों के प्रतिनिधि एवं जागरूक जिम्मेदार नागरिक उपस्थित रहे । ब्राह्मण समाज, क्षत्रिय समाज, गहोई समाज, अग्रवाल समाज, कायस्थ समाज एवं सिंधी समाज ने बड़ी संख्या में सहभाग किया ।
संयोजक राष्ट्रीय ब्राह्मण महासंघ के प्रदेश महासचिव धीरज मिश्रा ने कहा कि संशोधित यूजीसी अत्यंत गंभीर संवैधानिक एवं विधिक प्रश्न उत्पन्न करती है। यह अधिसूचना उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति आधारित भेद‌भाव को रोकने के उ‌द्देश्य से लाई गई बताई जा रही है तथा इसमें SC, ST, OBC एवं दिव्यांग छात्रों के अधिकारों की सुरक्षा पर विशेष बल दिया गया है।
इसके अंतर्गत सभी विश्वविद्यालयों एवं उच्च शिक्षा संस्थानों में 90 दिनों के भीतर इक्विटी कमेटियों के गठन का प्रावधान किया गया है, जिन्हें शिकायतों की जांच का अधिकार दिया गया है परन्तु सवर्ण समाज का यह स्पष्ट एवं दृढ़ मत है कि उक्त अधिसूचना भारत के संविधान में प्रदत समानता के मूल अधिकार (अनुच्छेद 14, 15 एवं 21) की भावना के अनुरूप नहीं है।
डॉ प्रशान्त रिछारिया ने कहा कि भारत का संविधान सभी नागरिकों को समानता का अधिकार प्रदान करता है, किंतु यह अधिसूचना समानता की समग्र अवधारणा को स्थापित करने के स्थान पर केवल SC, ST एवं OBC वर्ग के छात्रों के अधिकारों पर केंद्रित है, जबकि सामान्य वर्ग के छात्रों के अधिकारों एवं संवैधानिक संरक्षण को पूर्णतः नजरअंदाज करती है।
जिलाध्यक्ष ऋषिकेश रावत ने कहा कि यह अधिसूचना एकतरफा दृष्टिकोण अपनाते हुए समान अवसर के सि‌द्धांत को कमजोर करती है, जो कि संविधान की मूल संरचना के प्रतिकूल है। किसी भी कानून या नियम का उ‌द्देश्य सभी वर्गों के लिए न्याय सुनिश्चित करना होना चाहिए, न कि किसी एक वर्ग के पक्ष में असंतुलन उत्पन्न करना।
विरोध यात्रा का संचालन करते हुए बुन्देलखण्ड प्रमुख महामंत्री संजय राष्ट्रवादी ने कहा कि यह उल्लेखनीय है कि प्रारंभिक ड्राफ्ट में OBC वर्ग को शामिल न किए जाने तथा झूठी या फर्जी शिकायतों पर किसी प्रकार के दंडात्मक प्रावधान के अभाव को लेकर व्यापक विवाद उत्पन्न हुआ था। यद्यपि अंतिम संस्करण में OBC वर्ग को सम्मिलित कर लिया गया, तथापि दुर्भावनापूर्ण अथवा झूठी शिकायतों पर दंड का कोई प्रावधान न होना, इस अधिसूचना को और अधिक खतरनाक बनाता है तथा इसके दुरुपयोग की व्यापक संभावना उत्पन्न करता है, उत्तर प्रदेश सहित देश के अनेक राज्यों में यह अधिसूचना विश्व वि‌द्यालयों पर लागू की जा चुकी है, जिसके परिणामस्वरूप शैक्षणिक परिसरों में भय, असंतोष एवं असमानता का वातावरण उत्पन्न हो रहा है।
क्षत्रिय समाज से प्रतिनिधि राजा भैया यूथ ब्रिगेड जिलाध्यक्ष ठाकुर मधुपाल सिंह ने कहा कि यह तथ्य भी विचारणीय है कि भारत की अनुमानित जनसंख्या लगभग 140 करोड़ है, जिसमें से लगभग एक-तिहाई जनसंख्या सामान्य वर्ग की है, अर्थात लगभग 40 से 50 करोड़ नागरिक। इस प्रकार की अधिसूचनाएँ सामान्य वर्ग के करोड़ों छात्रों एवं नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का प्रत्यक्ष उल्लंघन करती हैं।
कायस्थ समाज से प्रतिनिधि मंगल श्रीवास्तव ने कहा कि देश के विकास, प्रशासन, शिक्षा, उ‌द्योग एवं राजस्व सृजन में सामान्य वर्ग का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण एवं अग्रणी रहा है। इसके बावजूद, इस प्रकार की अधिसूचनाओं के माध्यम से सामान्य वर्ग के अधिकारों एवं संवैधानिक संरक्षण का निरंतर हनन किया जाना, समाज में व्यापक असंतोष एवं नाराजगी को जन्म दे रहा है।
सिंधी समाज से प्रतिनिधि सुरेश मनकानी ने कहा कि सवर्ण समाज भारत सरकार से यह स्पष्ट एवं सशक्त मांग करती है कि उक्त UGC अधिसूचना को तत्काल प्रभाव से वापस (Rollback) लिया जाए तथा सभी वर्गों के छात्रों के अधिकारों को सगान रूप से ध्यान में रखते हुए एक निष्पक्ष, संतुलित एवं संविधान सम्मत नीति का निर्माण किया जाए ।
गहोई समाज से पंकज गुप्ता ने कहा कि जब तक इस अधिसूचना को वापस नहीं लिया जाता, सवर्ण समाज लोकतांत्रिक, संवैधानिक एवं विधिक तरीकों से इसका विरोध करती रहेगी तथा आवश्यकता पड़ने पर अपने संवैधानिक अधिकारों के अंतर्गत विधिक उपाय अपनाने के लिए भी बाध्य होगी।
जिलाधिकारी ने आश्वस्त करते हुए कहा कि पूर्ण विश्वास है कि माननीय प्रधानमंत्री महोदय इस गंभीर एवं संवेदनशील विषय पर शीघ्र संज्ञान लेते हुए न्यायोचित एवं राष्ट्रहित में निर्णय प्रदान करेंगे।
इस अवसर पर अखिल भारतीय कायस्थ समाज से अध्यक्ष मंगल श्रीवास्तव, आचार्य एन सी श्रीवास्तव, शिवांशु श्रीवास्तव सहित सैकड़ों लोग शामिल हुए, वहीं गहोई समाज से अध्यक्ष रामप्रकाश नाछोला, नरेश गुप्ता, प्रकाश गुप्ता, आशीष गुप्ता सहित समाज से बड़ी संख्या में उपस्थित रहे ।
वरिष्ठ पत्रकार सत्येंद्र मिश्रा ने यूजीसी विरोध स्वरूप सार्वजनिक सर मुंडा कर अपना आक्रोश व्यक्त किया ।
क्षत्रिय समाज से ठाकुर मधुपाल सिंह, देवेंद्र सिंग सेंगर, लाखन सिंह, सकेंद्र सिंह, सुमंत सिंह सहित अनेकों जागरूक जिम्मेदार उपस्थित रहे !
ब्राह्मण समाज से राष्ट्रीय ब्राह्मण महासंघ से प्रदेश महासचिव धीरज मिश्रा, बुन्देलखण्ड अध्यक्ष डॉ प्रशांत रिछारिया, प्रमुख महामंत्री संजय राष्ट्रवादी,
जिलाध्यक्ष ऋषिकेश रावत, महानगर अध्यक्ष डॉ विवेक बाजपेई युवा अध्यक्ष शिवम भार्गव , संजीव नायक, नीरज दुबे, संजय त्रिपाठी, रामकुमार दुबे, रामनारायण शर्मा, एड. संजीव, एड. राजीव रतूड़ी, सत्यकाम पुरोहित, मंजुल पुरोहित, राहुल मिश्रा, राकेश श्रीवास्तव, मानकेश सिंह, रोहित सेठ, संजय सिंह राठौर, अनिल अग्रवाल, पंकज अग्रवाल, पवन झारखरिया, डॉ विवेक तिवारी, डॉ देवेश रावत, डॉ गौरव बाजपेई, डॉ राकेश तिवारी, डॉ महेंद्र यादव, डॉ अतुलप्रताप सिंह, अमित पचौरी, संजीव नायक, पंकज रावत, पंकज मिश्रा, नीरज दुबे, रविकांत मिश्रा, दुर्गेश दुबे, संजय, नृपेंद्र सिंह, सोनू ठाकुर, संतोष गौड़, प्रदीप नाथ झा, कमलेश मिश्रा,आदि सहित बड़ी संख्या में सवर्ण जन उपस्थित रहे ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *