नई दिल्ली 10 जुलाई-पूर्व केन्द्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य के खिलाफ प्रेमनगर थाने मे दर्ज हुये मुकदमे को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। लाजिमी है कि कांग्रेस सहित अन्य दल के लोग भी मुकदमा लिखे जाने को लेकर सकते मंे हैं। वैसे तो हर कोई इसे राजनैतिक साजिश बता रहा है, लेकिन सवाल उठ रहा है कि आखिर किसके इशारे पर यह पूरा कांड रचा गया?
आम चुनाव नजदीक हैं। कहा जा सकता है कि 2019 के चुनाव का बिगुल बज चुका है। राजनीति के हर हथकंडे का प्रयोग इस दौर मे देखने को मिलेगा। जाहिर है कि यह बात पूरे देश मे होने वाली राजनैतिक नफा नुकसान वाली खबरो से जुड़ी होगी।
इन दिनो उप्र के झांसी मे ऐसा ही देखने को मिल रहा है। बीते दिनो प्रेमनगर थाना इलाके मे सुनील साहू नामक व्यक्ति की पुलिस प्रताड़ना के आरोप मे हुयी मौत के बाद हंगामा हुआ। इस प्रकरण मे पुलिस ने दो दिन बाद पूर्व केन्द्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य सहित करीब 250 लोगो के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया।
अब प्रदीप जैन और उनके समर्थक इस बात से हैरान है कि आखिर उन्हे ही क्यो मुकदमे मे नामजद किया गया। प्रदीप जैन का सवाल है कि मौके पर तो भाजपा नेता रवीन्द्र शुक्ल, महानगर अध्यक्ष प्रदीप सरावगी भी मौजूद थे। फिर एक तरफा कार्यवाही क्यो?
जानकार बता रहे हैं कि प्रदीप जैन के खिलाफ मुकदमा लिखा जाना सहज प्रक्रिया का हिस्सा नहीं है। अमूनन पुलिस कोर्ट के आदेश का पालन करते हुये हंगामा करने वालो के खिलाफ मामला दर्ज करती है। अधिकांश मामलो मे यह मुकदमा अज्ञात लोगो के खिलाफ दर्ज होता है।
सवाल उठ रहा है कि इतने लोगो की भीड़ मे पुलिस ने सबसे चर्चित चेहरे के रूप मे केवल प्रदीप जैन को पहचान लिया। बाकी 250 लोगो के नाम क्यो याद नहीं रहे? दूसरा पीड़ित परिवार को भी मुकदमे की जद मे ले लिया। इस प्रकरण से यह तो तय है कि मुकदमा कांड किसी सुनियोजित प्लानिंग का हिस्सा है। सवाल उठ रहा है कि यह मुकदमा किस प्लानिंग के तहत लिखा गया? क्या चुनाव से पहले साहू समाज को अपने पाले मे करने के लिये पहले मुकदमा लिखना और बाद मे नेताओ की सहानुभूति के साथ पाले मे करने का हिस्सा है? या फिर प्रदीप जैन को लपेटने के लिये पीड़ित परिवार को भी जबरन शामिल किया गया?
सूत्र बता रहे है कि मुकदमा प्रकरण की प्लानिंग एक ऐसा नेता के कहने पर हुयी है, जो आम चुनाव की तैयारी मे है! माना जा रहा है कि उन्हे लोकसभा चुनाव मे उतरने के लिये पार्टी की ओर से हरी झंडी मिलने के संकेत मिले हैं। इसलिये सबसे पहले प्रदीप जैन को राजनैतिक रास्ते से हटाने का यह फार्मूला निकाला गया?
इसके अलावा एक और जानकारी आ रही है कि पुलिस प्रशासन पर स्थानीय स्तर से दवाब रहा कि हंगामा को मुकदमा प्रकरण मे बदला जाए, ताकि इसके राजनैतिक फायदे की संभावना को तलाशा जाए?
अब कलम, कला और कृपाण की धरती मे चुनाव तक राजनैतिक दलो के हर पैतरे से जनता रूबरू होगी। वैसे प्रदीप के खिलाफ दर्ज मुकदमे को लेकर जिला स्तर पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है। स्वयं सेवी संगठनो से लेकर भाजपाई तक मान रहे हैं कि मुकदमा लिखना ठीक नहीं है! यहां यह कहा जा सकता है कि जिस व्यक्तित्व के इशारे और महत्वाकांक्षा ने यह हालात बनाये है, उन्हे पार्टी की ओर से सख्त संदेश भी मिलने शुरू हो गये हैं! यह इसलिये हो रहा है, क्येकि साहू समाज सड़क पर आ गया है। भाजपा के सामने मुसीबत यह हो गयी कि प्रदीप के मुकदमा के फेर मे आने से साहू समाज का गुस्सा पार्टी पर उतर रहा है। अब भाजपा समझ नहीं पा रही कि साहू समाज को कैसे समझाया जाए?
