नई दिल्ली 25 जनवरी भारत सरकार ने आज पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी नानाजी देशमुख और भूपेन हजारीका को भारत रत्न से सम्मानित करने का फैसला किया है ।सरकार के इस फैसले के बाद हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की अनदेखी पर एक बार फिर से सवाल उठने लगे हैं ।आखिर मेजर ध्यानचंद के व्यक्तित्व में ऐसी कौन सी कमी है जो सरकारें उन्हें भारत रत्न के लायक नहीं समझ रही हैं।
पूरे विश्व में हॉकी का नाम स्वर्णिम अक्षरों से लिखने के लिए अपने जीवन को समर्पित करने वाले हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद को भारत रत्न दिए जाने की मांग पिछले कई सालों से की जा रही है ।
यहां तक कि जब क्रिकेट खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर को इस सम्मान से नवाजे जाने की बात सामने आई तब भी मेजर ध्यानचंद के सम्मान को लेकर आवाज उठी थी । केंद्र में विराजमान होने वाली सरकारें अब तक मेजर ध्यानचंद के व्यक्तित्व के साथ न्याय नहीं कर पायी हैं।
बुंदेली माटी के लाल की कला का डंका हिटलर ने जब देखा, तो वह भी उनका मुरीद हो गया था । कलाइयों से हॉकी के जादुई अंदाज को देश और दुनिया के सामने प्रस्तुत करने वाले मेजर ध्यानचंद किसी की कृपा के पात्र नहीं हैं, लेकिन सरकारों को यह जरूर सोचना चाहिए कि ऐसी हस्तियां यदि भारत रत्न नहीं हो सकती, तो सरकार की नजरों में भारत रत्न के लिए किस प्रकार का व्यक्तित्व होना चाहिए, यह सवाल जनता जरूर कर रही है।
आज एक बार फिर देश में मेजर ध्यानचंद के समर्थकों और पूरी दुनिया को इस बात से निराशा हुई होगी कि मेजर का व्यक्तित्व शायद सरकार की नजरों में रत्न के लायक नहीं है।
खेल प्रेमियों की निराशा में उन्हें सरकार के प्रति नाराजगी भरा भी बना दिया है खेल प्रेमी अश्विनी कुमार का कहना है कि सरकार को मेजर ध्यानचंद को भारत रत्न देने में देर नहीं करनी चाहिए । वह इस सम्मान के पूरे हकदार हैं।
