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झाँसी-नामांकन की धमक ने आत्मसमर्पण वाली कांग्रेस के फाइट में आने के रास्ते खोले? रिपोर्ट-देवेन्द्र, सत्येंद्र,रोहित

झाँसी। झाँसी-ललितपुर सीट पर आज सपा-बसपा के साथ कांग्रेस के प्रत्याशी के रूप में शिवशरण कुशवाहा ने भी नामांकन किया। रोचक ये रहा कि कल तक कांग्रेस को आत्मसमर्पण वाली पार्टी मानकर चल रहे राजनीतिक पंडितों को ही जनसैलाब में फिर से आकलन के लिए मजबूर कर दिया है।

आपको बता दें कि संसदीय सीट पर कांग्रेस पार्टी में जन अधिकार पार्टी के साथ गठबंधन किया है गठबंधन में यह सी जन अधिकार पार्टी के खाते में गई है इस पार्टी से शिवचरण कुशवाहा मैदान में हैं हालांकि पहले गए जन अधिकार पार्टी के सिंबल पर चुनाव लड़ रहे थे लेकिन कांग्रेसी नेताओं की पहल के बाद उन्हें कांग्रेसी चंबल नदी मैदान में उतारने का फैसला किया गया।

कांग्रेस की जन अधिकार पार्टी के साथ गठबंधन की बात कांग्रेसियों में हताशा और निराशा के साथ इस बात का डर समा गया कि क्या बुंदेलखंड में कांग्रेश कितनी कमजोर मानी जा रही है ? चुनावी इतिहास में भी यह पहला मौका था जब पार्टी ने अपना उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारा । मीडिया में यह बात सुर्खियां बनी थी कि कांग्रेसमें मैदान में आने से पहले ही आत्मसमर्पण कर दिया!

चुनावी समीकरण भले ही इस दिशा में जान लेकिन कांग्रेसियों से स्टार प्रचारक और कद्दावर चेहरा प्रदीप जैन आदित्य ने आज दिखा दिया कि उनके आव्हान में अभी जान बाकी है।

यही कारण रहा कि आज जब कांग्रेश और जन अधिकार पार्टी के कार्यकर्ता नामांकन के लिए सड़क पर उतरे को राजनीतिक पंडितों को अपने कयास फिर से बदलने की जरूरत महसूस होने लगी। हालांकि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि कांग्रेसी फाइट से पूरी तरह बाहर है , लेकिन नामांकन में समर्थकों की मौजूदगी और प्रदीप जैन आदित्य बृजेंद्र व्यास, राहुल राय, सुधांशु त्रिपाठी जैसे नेताओं की मौजूदगी ने चुनावी रण में अपनी धमक कमजोर नहीं होने के संकेत दिए हैं।

अब यह सवाल उठने लगा है कि झांसी ललितपुर संसदीय सीट के लिए गठबंधन प्रत्याशी, भाजपा प्रत्याशी के बीच कांग्रेस और जन अधिकार पार्टी का प्रत्याशी अपनी जीत का रास्ता कैसे निकलता है ?

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