झाँसी। चुनावी दंगल में शोर शराबा थमने का आज आखिरी दिन था ।पिछले 15 दिन से समर्थकों, संगठन के लोगों और अपने जज्बे को चरम पर रखते हुए भाजपा प्रत्याशी अनुराग शर्मा ने पूरी ताकत जनता से अपना संवाद स्थापित करने में झोंक दी ।
अब बाजी जनता के हाथ में है । हालांकि अभी 1 दिन बाकी है , जिसमें जनता से संवाद बिना शोर-शराबे के किया जा सकता है, लेकिन व्यवस्थाओं को बनाने में यह समय कम पड़ेगा,सो आखरी प्रचार की उलझन में जब अनुराग एकांत हुए, तो चिंतन ने इस मैनेजमेंट गुरु को दो पल के लिए अपने साए में ले ही लिया। लगा कि हालात विषम है, विकट है या फिर परफेक्ट है?
कहते हैं कि चुनावी गणित अंतिम समय तक क्रिकेट मैच के उस गेंद की तरह होती हैं जो गेंदबाज के हाथ से निकल कर बल्लेबाज को पूरा मौका देती है की गेंद की दिशा वह किस प्रकार तय करता है या फिर गेंदबाज को जीत मिलती है । ऐसा ही कुछ नजारा चुनाव में अब देखने को मिलेगा। प्रत्याशियों ने अपनी बात अपने अंदाज और अपनी भूमिका को बनाते हुए लोगों में यह संदेश देने की पूरी कोशिश की कि वह आपकी सेवा में सर्वश्रेष्ठ साबित होंगे । एक बार मौका दें। यानी अब 1 दिन बाद मतदाता यह तय करेंगे कि किसी श्रेष्ठ मानना है और किसे विपक्ष के लायक रखना है ।
जाहिर है कि जीत किसी एक के खाते में जाएगी, लेकिन लाखों की संख्या वाले मतदाताओं का रुझान अधिक संख्या में जिस ओर होगा जीत उसके खाते में खड़ी होगी।
आज भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी अनुराग शर्मा ने प्रचार के अंतिम दौर में विधायक रवि शर्मा , महापौर रामतीर्थ सिंघल समेत सैकड़ों भाजपा पदाधिकारियों और समर्थकों के साथ झांसी के केंद्र बिंदु माने जाने वाले शहर में अपना पूरा फोकस किया।
दरसल, झांसी का राजनीतिक माहौल शहरी इलाके के सबसे पुराने इलाके बाजार में बोलता है। इस क्षेत्र से राजनीतिक हलचल पूरे इलाके में प्रभावित होने की दिशा और दशा तय करती है । इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि चुनावी अभियान में सारे दलों के प्रत्याशी अंतिम समय में अपनी ताकत का प्रदर्शन इस इलाके में करते हैं, चाहे वह कांग्रेस की दिग्गज नेता प्रियंका गांधी का रोड शो हो या नामांकन जुलूस निकालने की बारी।
आज अनुराग को पंचकुइयां से नरिया बाजार , सराफा बाजार, सुभाष गंज, बड़ा बाजार के रास्ते तय करने में अभिवादन और स्वागत की लम्हे जीत का एहसास तो करा रहे थे , लेकिन अंतिम निर्णय इस एहसास में किस रूप में छुपा है यह मतगणना के बाद ही नजर आएगा।
वैसे चुनावी आवरण बनाने में राजनीतिक दल कोई कसर नहीं छोड़ते हैं। शायद अनुराग ने अपनी मैनेजमेंट की कला को आखिरी लम्हे में पूरी शिद्दत से निभाने की कोशिश की । ये तस्वीर काफी कुछ बयां करती है। अनुराग का यह चिंतन और गहरे भाव में डूबा चेहरा बताता है कि पकड़ को लेकर वह पूरी तरह आश्वस्त नहीं है। बस उम्मीद और अरमानों को बुलंदियों तक ले जाने की ख्वाहिश परिणाम का इंतजार कर रही है।
अनुराग शर्मा का चुनावी मैनेजमेंट अफरा तफरी भरा है । शिकवा शिकायतों के दौर और अपनी स्वीकार्यता के लिए अनुराग रूठने मनानेके सिलसिले में जीत कैसे निकालते हैं, यह बड़ा ही दिलचस्प होगा।
अभी चुनाव उस गहरे पानी की तरह शांत नजर आ रहा है, जिसमें किसी तूफान के छिपे होने के संकेत मिलते हैं । अनुराग क्या भाजपा और जनता को स्वीकार होंगे या फिर गठबंधन के मतदाता विलय करते हुए उन्हें शिकस्त देंगे ? ऐसे कई सारे सवाल हैं जिसमें एक सवाल कांग्रेश और जन अधिकार पार्टी का भी है, जो खुद को छुपा रुस्तम मानते हुए धमाका करने का दावा कर रही है ।
शायद इन हालातों को गहराई तक समझने की कोशिश में अनुराग दिमाग के तार जीत के रास्ते से जोड़ने की कोशिश में जुटे हैं । परिवार ने पूरा साथ दिया और पराए भी दरवाजे तक आए। हालांकि अपने राजनीतिक कैरियर की शुरुआत में जिस तरह से बिना पार्टी कार्यालय में गए अनुराग भाजपाइयों के लिए पैराशूट प्रत्याशी जैसे हैं , लेकिन यही कार्य कर्ता उन्हें पार्टी हित में स्वीकार करेंगे या नहीं यह एक बड़ा सवाल है , जिसका उत्तर अब 23 मई को होने वाली मतगणना में ही पता चल सकेगा।
