भक्त के आंसू देखकर भगवान चले आते दौड़े-मुरारीदास
कोंच (जालौन)। दुख के समय आंखों में आंसू भरकर भक्तों द्वारा भगवान को पुकारे जाने पर भगवान भक्त के पास दौड़े चले आते हैं क्योंकि भगवान के लिये भक्तों के आंसू सबसे बड़ी भेंट हैं, उक्त बचन भगवताचार्य सन्त मुरारीदास महाराज ने कहे।
मुहल्ला जयप्रकाश नगर में स्थित अग्रवाल भवन पर आयोजित श्री मदभागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन उपस्थित श्रोताओं को कथा का रसपान कराते हुये मुरारीदास ने कहा कि समुद्र मंथन में पहले विष निकला था और बाद में अमृत, इसी प्रकार मानव जीवन में अगर पहले दुख प्राप्त होता है तो उसे सहर्ष स्वीकार करें क्योंकि दुख के बाद सुख निश्चित रूप से प्राप्त होगा, वहीं मुरारीदास ने कहा कि अपशब्द बोलकर किसी से कदापि बात ना करें क्योकि यह विष के समान है और हमेशा मीठी बाणी बोलें जो कि अमृत के समान है।
उन्होंने कहा कि तीन तरह के व्यक्तियों पर परमात्मा जल्द ही प्रसन्न हो जाते हैं और ऐसे व्यक्तियों में वह शामिल है जो बचपन से परमात्मा की भक्ति में लीन हो जाते हैं, गरीब होने पर भी सत्कर्म में लगे रहते हैं एंव सामर्थवान होने पर भी गरीबों व बेसहारा लोगों पर जुल्म नहीं करते हैं। कथा श्रवण करने वालों में प्रमुख रूप से पारीक्षत सीताराम अग्रवाल-तारादेवी, महेशचन्द्र, रमेशचन्द्र, सुरेशचन्द्र, नारायणदास, प्रदीप, मनोज अग्रवाल, अभिषेक अग्रवाल, स्वेता, दीपक गर्ग सहित सैकड़ों की संख्या में नगरवासी शामिल रहे।
सामी में भागवत कथा सुनने जुटे ग्रामीण
वहीं ग्राम सामी में आयोजित श्रीमद भागवत कथा में उपस्थित ग्रामीणों को
कथा वाचक अनूप शास्त्री अयोध्या धाम ने रविवार को भगवान श्रीकृष्ण की
जन्म कथा सुनाते हुये भगवान की महिमा का बर्णन किया। कथा सुनने वालों में
पारीक्षत मुन्नीलाल झां सहित अरविन्द पालीवाल, विनोद तिवारी, जगदीश सिंह,
रविन्द्र सोनी, जीतू सविता, हरिओम बुधौलिया, रवि पालीवाल, अभिषेक झां,
जेपी सविता, रामकुमार, धु्रव त्रिपाठी, राघव, रामनरेश आदि शामिल रहे।
