झांसी-कैसा महसूस कर रहे थे अपने ही स्कूल मे अतिथि बनकर रामतीर्थ सिंघल

झांसीः वक्त आपको कब, कहां और किस रूप मे प्रस्तुत करे, यह कोई नहीं जानता। यह बात महापौर रामतीर्थ सिंघल को एक समारोह मे देखने के बाद पूरी तरह चरितार्थ नजर आती है। जिस स्कूल मे वो आज मुख्य अतिथि बनकर गये, वो किसी और का नहीं, बल्कि उनका स्कूल है। इस स्कूल की वर्षों से देखरेख कर रहे रामतीर्थ ने सपने मे भी नहीं सोचा होगा कि अपने ही प्रागंण मे वो एक दिन महापौर बनकर बच्चो को संबोधन देगे।

स्हज और सरल रामतीर्थ महापौर के पद पर आसीन है। व्यापारी वर्ग से आने वाले रामतीर्थ स्कूल, बीड़ी कारोबार, कपड़ा कारोबार से लेकर अन्य कारोबार मे महारत हासिल रखते हैं।

स्वामी विवेकानंद के नाम से गुसांईपुरा मे उनका स्कूल पिछले कई सालो  से बच्चो  को शिक्षित करने का काम कर रहा है।

आपको बता दे कि स्कूल मे हर नेशनल पर्व पर समारोह का आयोजन किया जाता है। इसके अलावा कला, संस्कृति और सांस्कृतिक कार्यक्रमो  के आयोजन मे स्कूल पीछे नहीं रहा।

आज स्वामी विवेकानंद की जयन्ती पर स्कूल मे गोष्ठी का आयोजन था। अतिथि के रूप मे रामतीर्थ का आना लगभग तय था। उनके स्कूल मे अतिथि के रूप मे पहुंचने पर सभी ने गर्मजोशी से स्वागत किया।

इस पल मे महापौर रामतीर्थ के चेहरे के भाव बता रहे थे कि वो कितने खुश हैं। जिस संस्था को वर्षों की लगन के बल पर खड़ा किया, आज उसी संस्था मे अतिथि बनकर संबोधन करना उनहे अंदर की अंदर आनंदित कर रहा था। बच्चो  को भी रामतीर्थ यानि अपने स्कूल के बास का नया रूप काफी पसंद आया। सांस्कृतिक कार्यक्रमो  के दौरान स्वामी विवेकानंद के आदर्श और प्रेरणा की बाते हुयी और सभी ने एकजुटता के साथ आगे बढ़ने का संकल्प लिया।

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