मां और पिता के आशीर्वाद,अपने उच्चाधिकारियों के सहयोग तथा साथियों और मित्रो की शुभकामनाओं के कारण विश्व के सबसे ऊंचे रास्ते उमलिगंला पास 1900 फिट से भी अधिक ऊंचाई बहुत कम आक्सीजन लेबिल होते हुए भी 750 किमी से भी अधिक अपनी साईकिल यात्रा लेह से प्रारम्भ कर लेह में 11 दिन में दिनांक 25-7-23 को सफलतापूर्वक समाप्त की मेरे कुछ दूसरे साथी शायद इतने भाग्यशाली नहीं रहे,मेरा एक साथी गिर कर घायल हुआ रिब्स टूट गयी मैक्स दिल्ली में दो दिन बाद उसका ओप्रेशन किया गया ,दूसरे अनेक साथियों को छोटी-छोटी भी चोटे आयी और बीमार भी हुऐ और कयी लोगो को अपनी यात्रा को बीच में ही छोड़ना पड़ा जब की हमारे ग्रुप में 6 MD डाक्टर, पुडे के सबसे बड़े डाक्टर पाटिल तथा भोपाल एम्स ट्रॉमा सेन्टर के प्रमुख डॉ यूनुस जैसे लोग भी राइडिंग कर रहे थे,मैं भी थोड़ा अस्वस्थ हुआ था ,इस यात्रा में में मुझे दूसरे सबसे ऊंचे टंगलागला तथा नेबुरा पास से भी निकलना पड़ा परन्तु मैं और मेरे झांसी के मित्र वीरेन्द्र जी ने इन चुनौतियों को स्वीकार करते हुए इसे पूरा किया,इस यात्रा में मेरे द्वारा नेत्र दान ,महादान ,धरती बचाओ स्कूटर बाइक छोड़ो साइकिल चलाओ ,जैसे स्लोगन का उपयोग किया जिसे यहां में सभी साइकिलिस्ट साथियों ने बहुत पसन्द किया एवं इसको पूर्ण रूप मानने में विश्वास व्यक्त किया इसका मैं आप और उन सभी का जिन्होंने मुझे इस कार्य हेतु उत्साहित किया मेरा मान बढ़ाया,कि मैं अपने जीवन में इससे भी अधिक या अपनी क्षमता से भी अधिक कुछ और ऐसा कर सकूं,का मै ह्रदय से आभारी हू ,
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750 किमी से भी अधिक अपनी साईकिल यात्रा दिनांक 25-7-23 को सफलतापूर्वक समाप्त की रिपोर्ट: अनिल मौर्य
