लखनऊ: स्कूलों में बदला गया मिड डे मील का मेन्यू। पीएम पोषण योजना के तहत प्रदेश में स्कूली बच्चों को दिए जाने वाले मिड डे मील के मेन्यू में बदलाव किया गया है। बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए अब मेन्यू में श्रीअन्न (बाजरा) को शामिल किया गया है। अब हर दिन सब्जी और हफ्ते में चार दिन दालयुक्त भोजन देने का निर्णय लिया गया है।
नए वित्तीय वर्ष में केंद्र सरकार की ओर से मिड डे मील के लिए प्रति बच्चे दी जाने वाली राशि में वृद्धि की गई। इसी क्रम में पिछले दिनों हुई प्रोजेक्ट एप्रूवल बोर्ड (पीएबी) की बैठक में मेन्यू में सब्जी-दाल के प्रतिदिन प्रयोग व श्रीअन्न को सप्ताह में एक दिन शामिल किए जाने का निर्णय हुआ है। इसी क्रम में शासन ने सोमवार को मिडडे मील का संशोधित मेन्यू जारी कर दिया है। इसके अनुसार हफ्ते में एक दिन मूंग की दाल व मौसमी सब्जी युक्त बाजरे की खिचड़ी दी जाएगी। संशोधित मेन्यू के अनुसार सोमवार को रोटी, सोयाबीन युक्त मौसमी सब्जी व मौसमी फल, मंगलवार को चावल, सब्जी, दाल, बुधवार को मौसमी सब्जी, सोयाबीन की बड़ी युक्त तहरी व दूध दिया जाएगा। देखना अब यह होगा कि यह मिड डे मील में किए गए परिवर्तन क्या बच्चों तक पहुंचेगा या वो भी डकार लिया जायेगा। असलियत स्कूलों में पहुंचने पर पता चलती है, जो कि अधिकारी जानते ही नहीं हैं।
*लखनऊ: परिवहन निगम ने हटाईं 1936 खटारा बसें* समय पूरा कर चुके वाहनों को हटाने के आदेश के चलते, परिवहन निगम की 1936 बसें अब तक बेड़े से हटा दी गईं हैं। इससे यात्रियों को खासा परेशानी बढ़ गई है, अब उनकी जगह प्राइवेट बसें ले रही हैं, जो कि प्रतिबंधित हैं, फिर भी अवैध तरीके और प्रशासन और पुलिस की मिलीभगत से चल रही हैं।
विभाग का दावा है कि 650 बसों की बॉडी बन रही है। इन्हें जल्द ही बेड़े में शामिल किया जाएगा। इससे यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है। पैसेंजर ट्रेनों के बंद होने के बाद यात्रियों के लिए सरकारी बसें आवागमन का सबसे बड़ा जरिया हैं। लेकिन, इधर पुरानी बसों को बेड़े से हटाने से अधिकतर डिपो में बसों का संकट हो गया।
करीब 1025 नई बसें बेड़े में शामिल हुईं, फिर भी करीब 900 बसों का गैप है। इसका खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। मुरादाबाद के यात्री विनोद कुमार कहते हैं कि बस कम होने का असर रात्रि सेवा में आया है। बरेली, अमरोहा, संभल आदि के लिए बसें कम मिल रही हैं, पूर्वांचल और उत्तरी उत्तर प्रदेश में प्राइवेट बसों का बोलबाला बढ़ता ही जा रहा है, पर सरकार इसे ना रोक कर, परिवहन निगम की बसें घटा कर प्राइवेट बसों को और योगदान प्रदान कर रहा है।
