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एजेंसियों द्वारा जांच के दौरान मोबाइल, लैपटॉप ज़ब्त करना खतरनाक है”- सुप्रीम कोर्ट का बयान

“एजेंसियों द्वारा जांच के दौरान मोबाइल, लैपटॉप ज़ब्त करना खतरनाक है” सुप्रीम कोर्ट का बयान।

*खूनी संघर्ष मामले में पुलिस ने आरोपी पक्ष के दो लोगों पर की शांतिभंग की कार्रवाई*

_*दूसरे पक्ष ने भी एफआईआर के लिए दी तहरीर, पुलिस ने नकारा*_

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*कोंच (जालौन)।* गोखले नगर में हुए खूनी संघर्ष मामले में पुलिस ने मंगलवार को आरोपी पक्ष के दो लोगों के खिलाफ शांतिभंग की कार्रवाई की है। इस मामले में सोमवार को दूसरे पक्ष ने भी एफआईआर दर्ज कराने के लिए पुलिस को तहरीर दी है लेकिन पुलिस तहरीर मिलने की बात को साफतौर पर नकार रही है।
गौरतलब है कि दो दिन पहले रविवार को कस्बे के मोहल्ला गोखले नगर में मकान निर्माण को लेकर दो पक्षों जिनमें एक विश्वकर्मा और दूसरा कुशवाहा है, में खूनी संघर्ष हो गया था जिसमें दोनों पक्षों के सात लोग घायल हुए थे। कोतवाली पुलिस ने विश्वकर्मा पक्ष की ओर से मिली तहरीर के आधार पर कुशवाहा पक्ष के चार लोगों के खिलाफ मारपीट की धाराओं में एफआईआर दर्ज की थी। मंगलवार को सुरही चौकी इंचार्ज संदीप कुमार ने आरोपी पक्ष के दो लोगों हरीमोहन व किशोरीशरण को पकड़ कर उनका शांतिभंग में चालान किया है। इधर, मिली जानकारी में बताया गया है कि कुशवाहा पक्ष ने भी सोमवार को विश्वकर्मा पक्ष के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए पुलिस को तहरीर दी थी लेकिन पुलिस इसे नकार रही है। कुशवाहा पक्ष की गीता देवी पत्नी किशोरीशरण ने कोतवाली पुलिस को प्रार्थना पत्र देकर बताया कि उसके घर के पास नगरपालिका की छह फीट चौड़ी रास्ता है जिसपर राजेंद्र विश्वकर्मा आदि अतिक्रमण कर मकान निर्माण कर रहे थे। जब उसके पति किशोरीशरण व जेठ हरीमोहन ने उन्हें मकान निर्माण करने से रोका तो उनके घर के आधा दर्जन से अधिक लोग ईंट पत्थर चलाने लगे और लाठी डंडों से हमला कर दिया। इस संबंध में कोतवाल नागेंद्र कुमार पाठक का साफ कहना है कि उन्हें ऐसी कोई तहरीर नहीं मिली है।

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