II *जय माता दी* II
II *जय माता दी* II *अयि गिरि नन्दिनी नन्दितमेदिनि* *विश्वविनोदिनि नन्दिनुते।* *गिरिवर विन्ध्यशिरोधिनिवासिनी* *विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते।* *भगवति हे शितिकण्ठकुटुम्बिनि* *भूरिकुटुम्बिनि भूरिकृते।* *जय जय हे महिषासुरमर्दिनि* *रम्यकपर्दिनि शैलसुते।।* *अर्थ:-* *हे हिमालायराज की कन्या, विश्व को आनंद देने वाली, नंदी गणों के द्वारा नमस्कृत, गिरिवर विन्ध्याचल के शिरो (शिखर) पर निवास करने वाली, भगवान् विष्णु को प्रसन्न करने…
