उसी की शरण लो जो हर वक़्त तुम्हारे साथ रहे
एक बार एक महात्मा जी बीच बाजार में से कहीँ जा रहे थे* *वहीं पास के एक कोठे की छत पर एक वैश्या पान खा रही थी* *अचानक उसने बेख्याली से उसने पान की पीक नीचे थूकी* *और वो पीक नीचे जा रहे महात्मा जी के ऊपर गिरी* *महात्मा जी ने ऊपर देखा वेश्या…
