योगी सरकार गाय को लेकर क्या फैसला लिया?

लखनउ 27दिसम्बरः प्रदेश की भाजपा सरकार अब प्रदेश मे गाय की संख्या की गिनती करायेगी। इसको कैबिनेट मे मंजूरी मिल गयी है। इतना ही नहीं, भैस, बकरी और सुअर की भी गिनती होगी। सरकार ने फैसला किया है कि अब गाय सहित अन्य जानवरो की संख्या बल का पता लगाया जाएगा। इनकी गिनती की जाएगी।…

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यूपीकोका पहला फायदा योगी को, केस वापस लेने के आदेश जारी

लखनउ 27 दिसम्बरः प्रदेश सरकार द्वारा लाये गये यूपीकोका बिल का सबसे पहला फायदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को हो रहा है। सरकार ने उनके खिलाफ दर्ज केस वापस लेने के आदेश दिये हैं। आपको बता दे कि 1995 मंे योगी के खिलाफ धारा 188 के तहत केस दर्ज है। योगी के अलावा शिव प्रताप शुक्ल,…

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हथेली पर कौन सा निशान आपको अपराजित बनाता है?

झांसी 26 दिसम्बरः यू तो ज्योतिष मे सभी की रूचि रहती है। ज्योतिष ऐसी विधा है, जिसे भारत मे जन्मा मना जाता है। हस्तरेखा मे बताया जाता है कि जिन लोगो  के हाथ मे एक्स का निशान होता है, वो दुनिया के सबसे बलवान व्यक्ति होते हैं। इन्हे पराजित करना मुमकिन नहीं। हथेली पर अक्षर…

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जानिये क्या वो आप है,जिसे नये साल मे सरकारी नौकरी मिलेगी?

झांसी 26 दिसम्बरः वैसे तो ग्रह अपनी चाल अपनी नियत गति से चलते हैं,लेकिन नये साल 2018 मे ग्रह भी कुछ नया करने के मूड मंे हैं। यदि आप इन राशियो मे हैं, तो आपके लिये अच्छी खबर ला सकता है नया साल। इस साल आपको सरकारी नौकरी मिलने की पूरी उम्मीद है। हर कोई…

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सेंसेक्स मे जबरदस्त उछाल, 34 हजार के पार

नई दिल्ली 26 दिसम्बरः सेसेक्स मे जबरदस्त उछाल मारी है। करीब 34 हजार के पार पहुंचने पर आफिस मे जश्न का माहौल है। सभी एक दूसरे को बधाई दे रहे हैं। कारोबार के आखिरी घंटे में बैंक, ऑटो, आईटी, एफएमसीजी शेयरों में खरीददारी लौटने से घरेलू स्टॉक मार्केट नए शिखर पर पहुंच गया। सेंसेक्स 34…

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शर्मनाक! चाचा ने बनाया भतीजी को हवस का शिकार

लखनउ 26 दिसम्बरः यूपी के बांदा मे एक हैवानियत भरा मामला सामने आया है। यहां चाचा ने भतीजी को अपनी हवस का शिकार बना लिया। नरैनी रोड स्थित राजादेवी डिग्री कालेज के पास के इस मामले मंे पांच साल की मासूम को चाचा ने हवस का शिकार बना लिया। नगर कोतवाल डीपी तिवारी ने बताया…

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राम मोहम्मद सिंह आज़ाद को हार्दिक भावभीनी श्रृध्दान्जली।

आपको पढ़कर अचरज हो रहा होगा, यह भला कैसा नाम है? वह हिंदू थे या मुसलमान? मैं उसकी चर्चा क्यों कर रहा हूं? कौन था यह शख्स? बताता चलूं। सरदार उधम सिंह (26 दिसम्बर 1899 से 31 जुलाई 1940) का नाम भारत की आज़ादी की लड़ाई में पंजाब के क्रान्तिकारी के रूप में दर्ज है। आज उनकी 119वीं जयन्ती है । सरदार उधम सिंह का जन्म 26 दिसम्बर 1899 को एक सिख परिवार में पंजाब राज्य के संगरूर जिले के सुनाम गाँव में हुआ था | सरदार उधम सिंह की माँ का उनके जन्म के दो वर्ष बाद 1901 में देहांत हो गया था और पिताजी सरदार तेजपाल सिंह रेलवे में कर्मचारी थेजिनका उधम सिंह के जन्म के 8 साल बाद 1907 में देहांत हो गया था | इस तरह केवल 8 वर्ष की उम्र के उनके सर से माता पिता का साया उठ चूका था | अब उनके माता पिता की मृत्यु के बाद उनके बड़े भाई मुक्ता सिंह उधम सिंह को अमृतसर के खालसा अनाथालय में दाखिला कराया | शहीद उधम सिंह का बचपन में नाम शेर सिंह था लेकिन अनाथालय में सिख दीक्षा संस्कार देकर उनको उधम सिंह नाम दिया गया | 1918 में मैट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण करने के पश्चात 1919 में उन्होंने अनाथालय छोड़ दिया | 13 अप्रैल 1919 को स्थानीय नेताओ ने अंग्रेजो के रोलेट एक्ट के विरोध में जलियावाला बाग़ में एक विशाल सभा का आयोजन किया था | इस रोलेट एक्ट के कारण भारतीयों के मूल अधिकारों का हनन हो रहा था | अमृतसर के जलियावाला बाग़ में उस समय लगभग 20000 निहत्थे प्रदर्शनकारी जमा हुए थे | उस समय उधम सिंह उस विशाल सभा के लिए पानी की व्यवस्था में लगे हुए थे | जब अंग्रेज जनरल डायर को जलियावाला बाग़ में विद्रोह का पता चला तो उसने विद्रोह का दमन करने के लिए अपनी सेना को बिना किसी पूर्व सुचना के निहत्थे प्रदर्शनकारीयो पर अंधाधुंध गोलिया चलाने का आदेश दिया | अब डायर के आदेश पर डायर की सेना ने 15 मिनट में 1650 राउंड गोलिया चलाई थी | जब गोलिया चली तब जलियावाला बाग़ में प्रवेश करने और बाहर निकलने का सिर्फ एक ही रास्ता था और चारो तरफ से चाहरदीवारी से घिरा हुआ था | उस छोटे से दरवाजे पर भी जनरल डायर ने तोप लगवा दी थी और जो भी बाहर निकलने का प्रयास करता उसे तोप सेउड़ा दिया जाता था | अब लोगो के लिए बाहर निकलने का कोई रास्ता नही था और लगभग 3000 निहत्थे लोग उस भारी नरसंहार में मारे गये थे | उस जलियावाला बाग़ में एक कुंवा था लोग अपनी जान बचाने के लिए उस कुंवे में कूद गये लेकिन कुंवे में बचने के बजायलाशो का ढेर लग गया | इसके बाद भी जब जनरल डायर वहां से निकलते वक़्त अमृतसर की गलियों में भारतीयों को गोलियां मारते हुए गया | उस नरसंहार में शहीद उधम सिंह  जीवित बच गये थे और उन्होंने अपनी आँखों से ये नरसंहार देखा था जिससे उन्हें भारी आघात लगा | उधम सिंह उस समय लगभग 11-12 वर्ष के थे और इतनी कम उम्र में उन्होंने संकल्प लिया कि “जिस डायर ने क्रूरता के साथ मेरे देश केनागरिको की हत्या की है इस डायर को मै जीवित नही छोडूंगा और यही मेरे जीवन का आखिरी संकल्प है ” | अब उधम सिंह अपने संकल्प को पूरा करने के लिए 1924 में वो ग़दर पार्टी में शामिल हो गये और भगत सिंह के पद चिन्हों पर चलने लगे | वह भारत की दुर्दशा के लिए ज़िम्मेदार कापुरुषता, सांप्रदायिकता और सामाजिक बिखराव को रोज़-ब-रोज़ पढ़ते गए, गुनते गए। इसीलिए भारतीय श्रमिक संघ और हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन में काम करते हुए उन्होंने अपना नाम राम मोहम्मद सिंहआज़ाद रख लिया। जो साम्प्रदायिक एकता का प्रतीक बना । अब उन्होंने विदेश जाने का विचार किया क्योंकि उनको वहां से असलहा गोला बारूद लाना था | इसके लिए उनके पास धन नहीं  था। तो उन्होंने धन इकट्ठा करने के लिए बढ़ई का काम करना शुरू कर दिया था | लकड़ी का काम करते करते उन्होंने इतना पैसा कमा लिया किवो विदेश चले  गये ।  भगत सिंह के कहने पर वो विदेश से हथियार लेकर आये लेकिन बिना लाइसेंस हथियार रखने के जुर्म में उनको पांच वर्ष की सज़ा हो गयी | 1931 में उनकी रिहाई हो गयी और अब उन्होंने फिर विदेश जाकर हथियार लाने की योजना बनाई | इस बार वो पुलिस को चकमा देकर पहले कश्मीर पहुंचे और वहाँ से जर्मनी चले गये | 1934 से जर्मनी से लन्दन पहुंच गये और लन्दन में जाकर उन्होंने एक होटल में वेटर का काम किया  ताकि कुछ ओर पैसे इकट्ठे कर बन्दुक़ ख़रीदी जा सके | उनको ये सब काम करने मेंपुरे 21 साल लग गये । फिर भी उनके मन में प्रतिशोध की ज्वाला कम नही हुयी थी | ज़रा सोचिए, एक अनाथ नौजवान, जिसके पल्ले में कुछ न हो, वह यूरोपीय और अफ्रीकी देशों से होता हुआ लंदन पहुंचता है। वहां मकान किराये पर लेता है। एक कार खरीदता है और साथ ही रिवॉल्वर भी। वह अपनी योजनाओं को अमली जामा पहना पाते, इससे पहलेजनरल डायर अपनी मौत मर गया, पर हत्याकांड का हुक्मनामा जारी करने वाला उसका बॉस यानी लेफ्टिनेंट गर्वनर सर माइकल ओडवायर ज़िंदा था। उधम सिंह ने उसके वध का फैसला किया। एक दिन उन्हें मालूम पड़ा कि ओडवायर रॉयल सेंट्रल एशियन सोसायटी की सभा में भाग लेने के लिए लंदन के कैक्सटन हॉल में आने वाला है। उन्होंने एक मोटी किताब को बीच में से इस तरह काटा कि उसमें रिवॉल्वर समा सके। अगले कुछ घंटे उनका मनोरथ साधने वालेसाबित हुए। पर यह सच है कि इस कांड के बाद वह जीते जी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सितारे बन गए। 31 जुलाई, 1940 को बरतानिया की पेंटनविले जेल में उन्हें फांसी दे दी गई थी। उम्र- 40 साल। आरोप- हत्या, राष्ट्रद्रोह आदि- सर्वाधिक संगीन मामलों में सज़ा-ए-मौत दी गई । उधम सिंह के प्रशंसक कहते हैं कि उन्होंने खुद को इसलिए गिरफ्तार करवा दिया था, ताकि उनका संदेश पूरी दुनिया तक पहुंच सके। ऐसा करते वक्त यक़ीनन उन्हें मालूम था कि अंग्रेज सूली पर चढ़ा देंगे। हो सकता है कि उनके प्रशंसक इस मामले में अतिरेक करते हों, परयह सच है कि उसी कालखंड में भगत सिंह और उनके साथियों ने असेंबली में इस नीयत से बम फेंका था, ताकि बहरे भी सुन सकें। वे इसका अंजाम जानते थे।…

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झांसी-पिता रोता रहा, बेटे लाठी से पीटते रहे

झांसीः कलियुग मे जो ना हो जाए सो कम है। एक पिता को बेटा ने जमकर पीटा। वो रोता रहा, लेकिन बेटांे को रहम नहीं आयी। बेटा की पिटाई से परेशान पिता ने पुलिस से गुहार लगायी, लेकिन पुलिस ने भी नहीं सुनी। बाद मे वो न्यायालय पहुंचा। बबीना क्षेत्र के चमरउआ गांव की यह…

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जानिये कहां पेड़ पर लटकी मिली दो बहनो की लाश

नोएडा 26 दिसम्बरः सेक्टर 49 स्थित बरोला गांव मे दो बहनो की लाश मिलने से सनसनी फैल गयी। परिजनो ने आरोप लगाया कि हत्या कर शव पेड़ से लटकाये गये। पुलिस इसे खुदकुशी का मामला बता रही है। जानकारी के मुताबिक, नोएडा के सेक्टर-49 स्थित बरोला गांव में दो सगी बहने लक्ष्मी (18) और निशा…

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जानिये योगी ने बुन्देलखण्ड के लिये क्या दिया?

नई दिल्ली 25 दिसम्बरः यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्य ने मेजेंडा रेल लाइन के उदघाटन अवसर पर बुन्देलखण्ड की झोली भरने की घोषणा की। योगी ने बुन्देलखण्ड मे एक्सप्रेस-वे और कानपुर व आगरा मे मेटो की सौगात दी। योगी ने पूर्वान्चल की तर्ज पर बुन्देलखण्ड मे भी एक्सप्रेस-वे बनाने की बात कहीं। योगी आदित्यनाथ ने…

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