झांसी। ज़िन्दगी जीने के लिए रोज करते हैं मौत का सफर जीहां झाँसी मुख्यालय से महज़ 30 किलोमीटर की दुरी पर स्थित गाँव उज्यान के लोगों की ज़िन्दगी में कब अन्धेरा हो जाय कहा नही जा सकता इस गाँव के बाशिंदे अपनी ज़िन्दगी को जीने के लिए हर रोज मौत का सफर करते है ।
केंद्र और प्रदेश की सरकारें स्मार्ट सिटी एवं स्मार्ट व्लेज बनाने की बात तो करती हैं लेकिन अमली जामा पहनाने में शायद इन सरकारों को अपने चुनावी जुमलों में कोई फायदा नज़र नही आरहा होगा और इसी लिए इन सरकारों को गाँवों के विकास में कोई रूचि नही है ।
दो विधानसभाओं के बीच फंसा यह इलाका अक्सर राजनीति की भेट चढ़ जाता है अगर हम उज्जयान गांव की बात करें तो यह मऊरानीपुर क्षेत्र में आता है तो वहीं परीक्षा दूसरी साइट जो है वह बबीना विधानसभा में आती है ऐसे में दोनों ही जनप्रतिनिधि इस समस्या की ओर उदासीन बने हुए हैं जबकि पूर्व में 1994 में यहां एक बड़ा हादसा भी हो चुका है जिसमें लगभग 35 लोगों की जान चली गई थी लेकिन उसके बावजूद भी राजनेता हो या अधिकारी सब इस समस्या से उदासीन बने बैठे हैं
जीहां हम बात कर रहे हैं उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड में झाँसी से महज़ 20 किलो मीटर की दुरी पर स्थित गाँव उज्यान जिसके आसपास बिछोन्दा, बीत्री जैसे लग भाग 25 गाँव और भी हैं इन गाँवों में रहने वालों को जब अपने खाने पीने की रोज़मर्रा चीज़ों की जरूरत पड़ती है तो उन्हें इन चीज़ों को लेने के लिए जाना पड़ता है मौत के सफर पर जीहां ये हम नही कह रहे हैं ये तस्वीरें खुद ब्यान कर रही इस मौत के सफर को तस्वीरों को देख कर आप अंदाजा लगा सकते है जहां आज के दौर में लोग चाँद पर घर बनाने की बात कर रहे हैं और वंही बुंदेलखंड के गांवों की हालात बद से बदतर आज भी है
उज्यान गाँव में रहने वाले सुधीर का कहना है की गाँव तक जाने का सिर्फ यही एक रास्ता है जिसे हमे रोज़ लकड़ी या लोहे की नाव पर बैठ कर पार करना पड़ता है रोजमर्रा की छोटी छोटी चीज़ों को लाने के लिए उफ्नाती हुई नदी को पार करना पड़ता है किसी भी वक़्त कोई भी बड़ा हादसा हो सकता है
गाँव में रहने वाले मनोज बतातें है की कई मर्तबा उच्च अधिकारियों को लिख कर दिया है की इस नदी पर एक पुल बनवा दिया जाये लेकिन कभी भी उन अधिआकारियों के कानों पर जूं नहीं रेंगी शायद किसी बड़ी घटना का इंतज़ार कर रहे हैं ।
केन्द्र और उत्तर प्रदेश सरकार की स्मार्ट सिटी एवं स्मार्ट विलेज की योजनाओं को इन गाँवों की स्थिति मुहँ चिढ़ाती साफ़ नज़र आ रही हैं जहाँ सैकड़ों ज़ीन्दीगी मौत के साये में है वहीं केंद्र और प्रदेश सरकार बुंदेलखंड के इन गाँवों से पूरी तरह से अनभिज्ञ हैं
