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Jhansi: पहूज नदी को प्रदूषित/नष्ट करने के संबंध में NGT में वाद दाखिल किया

. झांसी जिले में स्थित जीवनदायिनी पहूज नदी को संबंधित विभागों अधिकारियों द्वारा आस पास क्षेत्र के गंदे नाले डालकर नदी को प्रदूषित/नष्ट किया जा रहा है। जिससे पहूज नदी का पानी पूरी तरह से प्रदूषित हो गया है। प्रशासन और विभागों की मिलीभगत से पहूज नदी में डाले गये गंदे नालों के कारण नदी का बड़ा हिस्सा तलछट, गाद, मलबा और जलकुंभी, खरपतवार से भर गया है। जिसको संलग्न फोटोग्राफ में पहूज नदी में डाले गये गंदे नाले व ठोस अपशिष्ट और जलकुंभी एवं जलीय खरपतवार को स्पष्ट देखा जा सकता है।

जब कि माननीय उच्चतम न्यायालय, माननीय उच्च न्यायालय और माननीय एनजीटी द्वारा नदियों में नालियों और नालों का दूषित जल डालने से रोकने, नदियों का सीमांकन एवं जीर्णोद्धार और साफ- सफाई कराने तथा नदियों के किनारे 200 मीटर क्षेत्र में ग्रीन बेल्ट विकसित कराने के हेतु लगातर आदेश जारी किये गये तथा उक्त आदेशों के अनुक्रम में उत्तर प्रदेश शासन द्वारा शासनादेश जारी कर प्रशासन और संबंधित विभागों को प्रभावी कार्यवाही करने हेतु दिशा-निर्देश दिये गये है। इसके बावजूद प्रशासन और संबंधित विभागों द्वारा आज तक पहूज नदी में डाले जा रहे दूषित जल-मल के नालों, नालियों और ठोस अपशिष्ट को रोका नही गया है और ना ही नदी का सीमांकन, जीर्णोद्धार, साफ-सफाई तथा नदी किनारे 200 मीटर क्षेत्र में ग्रीन बेल्ट विकसित की प्रभावी कार्यवाही की गयी है।

श्रीमान् जी उल्लेखनीय है कि केन्द्र और सरकार द्वारा नदियों में दूषित जल के नालों, नालियों और ठोस अपशिष्ट की रोकथाम और साफ-सफाई व जीर्णोद्धार के लिए करोड़ों रूपया दिया जा रहा है। लेकिन जिम्मेदारो अधिकारियों ने धरातल पर काम करने के बजाय रूपयों का बंदरबांट कर दिया है। जिसकी केन्द्रीय स्तर पर तथ्यात्मक एवं सटीक जांच कराई जानी अति आवश्यक है।

अतः श्रीमान् जी से निवेदन है कि पर्यावरण हित में पहूज नदी को प्रदूषित/नष्ट करने वाली गतिविधियों की केन्द्रीय स्तर पर तथ्यात्मक एवं सटीक जांच कराकर दोषियों के खिलाफ प्रदूषक भुगतान सिद्धांत’ के अनुसार कार्यवाही करें तथा पहूज नदी के तलछट, गाद हटवाकर एवं साफ-सफाई कराकर माननीय उच्चतम न्यायालय और माननीय एनजीटी की गाइडलाइन के अनुसार पहूज नदी को मूल स्वरूप में जीर्णोद्धार तथा नदी किनारे ग्रीन बेल्ट विकसित कराने की कृपा करें।

नोट- उक्त प्रकरण में शीघ्र और प्रभावी कार्यवाही न होने की स्थिति में मजबूरन माननीय राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण, नई दिल्ली, में शिकायत दायर की जायेगी।

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